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उत्तराखंड में 19 लाख मतदाताओं का वोट कटने की कगार पर,

उत्तराखंड में करीब 19 लाख मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। चुनाव आयोग की ओर से लगातार अपील और जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद बड़ी संख्या में मतदाता अब तक बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मैपिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए हैं। यदि …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 04 फ़र, 2026
उत्तराखंड में 19 लाख मतदाताओं का वोट कटने की कगार पर,

उत्तराखंड में करीब 19 लाख मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। चुनाव आयोग की ओर से लगातार अपील और जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद बड़ी संख्या में मतदाता अब तक बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मैपिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए हैं। यदि जल्द ही इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के दौरान इन मतदाताओं का नाम सूची से हटाया जा सकता है।

राज्य में कुल 84,42,263 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से अब तक 64,63,099 मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग पूरी कर ली गई है। लेकिन अभी भी 19,79,164 मतदाता ऐसे हैं, जिन्होंने बार-बार संपर्क किए जाने और चुनाव आयोग की अपील के बावजूद इस प्रक्रिया में भाग नहीं लिया है।

चुनाव आयोग द्वारा प्री-एसआईआर मैपिंग अभियान लगातार चलाया जा रहा है, ताकि मतदाता सूची को अपडेट और त्रुटिरहित बनाया जा सके। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य फर्जी, डुप्लीकेट या गलत पते वाले मतदाताओं की पहचान करना है। लेकिन लाखों मतदाताओं की ओर से सहयोग न मिलने के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

चुनाव विभाग के अनुसार, यदि ये मतदाता समय रहते बीएलओ से संपर्क कर अपनी जानकारी सत्यापित नहीं कराते हैं, तो एसआईआर अभियान के दौरान उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस का जवाब न मिलने की स्थिति में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।

विभिन्न जिलों में बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया जा रहा है, लेकिन कई लोग या तो घर पर उपलब्ध नहीं मिल रहे हैं या फिर प्रक्रिया में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे आने वाले चुनावों में उनकी मतदान की पात्रता समाप्त हो सकती है।

चुनाव आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपने संबंधित बीएलओ से संपर्क करें और अपनी जानकारी अपडेट कराएं, ताकि भविष्य में मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

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