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उत्तराखंड में चिपको आंदोलन की 49 वीं वर्षगांठ रैणी में मनाई गई:

ग्रामीण हर साल इस अवसर को मनाते हैं और इसे वृक्षारोपण के साथ चिह्नित करते हैं। स्थानीय लोगों ने गांव में इकट्ठा होकर आंदोलन की नेता गौरा देवी को श्रद्धांजलि दी। उनके कार्यों को याद किया और इस अवसर पर पर्यावरण पर अपने विचार व्यक्त किए। 26 मार्च 1974 को …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 27 मा, 2023
उत्तराखंड में चिपको आंदोलन की 49 वीं वर्षगांठ रैणी में मनाई गई:

ग्रामीण हर साल इस अवसर को मनाते हैं और इसे वृक्षारोपण के साथ चिह्नित करते हैं।

स्थानीय लोगों ने गांव में इकट्ठा होकर आंदोलन की नेता गौरा देवी को श्रद्धांजलि दी।

उनके कार्यों को याद किया और इस अवसर पर पर्यावरण पर अपने विचार व्यक्त किए।

26 मार्च 1974 को रैणी गांव में वनों को बचाने के लिए आंदोलन शुरू हुआ और बाद में चिपको आंदोलन के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

गौरा देवी की सहेली बानो देवी ने बताया कि 1974 में आज ही के दिन एक ठेकेदार के कर्मचारी गांव में पेड़ काटने आए थे।

गाँव की महिलाओं ने पेड़ों को गले लगा लिया था और कहा था कि वे अपने जंगल के पेड़ों को काटने के बजाय मरना पसंद करेंगी।

गौरा देवी के नेतृत्व वाली महिलाओं ने ठेकेदार का पुरजोर विरोध किया।

जिसके कारण मजदूर बिना पेड़ काटे वापस चले गए।

गौरा देवी की स्मृति को जीवित रखने के लिए महिलाएं इस अवसर पर पौधे लगाती हैं।

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