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मसूरी में आयोजित हुआ भव्य भद्रराज मेला, भद्रराज मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, बलराम भगवान की जयकारों से गूंजी वादी

मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित दुधली की भद्राज पहाड़ी पर, श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ा , भगवान बलराम को समर्पित भद्रराज मेला में हजारों श्रद्धालु भारी बारिश के बीच भी शामिल हुए। सुबह की पहली किरण के साथ ही भक्तों की भीड़ मंदिर …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 18 अग, 2025
मसूरी में आयोजित हुआ भव्य भद्रराज मेला, भद्रराज मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, बलराम भगवान की जयकारों से गूंजी वादी

मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित दुधली की भद्राज पहाड़ी पर, श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ा , भगवान बलराम को समर्पित भद्रराज मेला में हजारों श्रद्धालु भारी बारिश के बीच भी शामिल हुए। सुबह की पहली किरण के साथ ही भक्तों की भीड़ मंदिर की ओर बढ़ चली। हरे-भरे जंगलों और बादलों से ढके रास्तों को पार कर लोग भद्रराज देवता के दर्शन को पहुंचे।

पौराणिक मान्यता
मान्यता है कि प्राचीन काल में जब जौनसार और पछुवादून के ग्रामीण अपने मवेशियों को चौमासे के समय इस पहाड़ी पर चराने लाते थे, तो एक राक्षस उनके पशुओं का वध करता था। तब भगवान बलराम ने राक्षस का संहार कर पशुओं की रक्षा की और लंबे समय तक चरवाहों के बीच रहकर उन्हें सहारा दिया। तभी से यहां उनका मंदिर स्थापित हुआ और भद्रराज देवता के रूप में उनकी पूजा होने लगी।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में ऋषि वेश धारण कर भगवान बलराम इस क्षेत्र से गुजरे थे। उस समय पशुओं में फैली महामारी को उन्होंने दूर किया और आशीर्वाद दिया कि कलयुग में वे इसी स्थान पर भद्रराज देव के रूप में वास करेंगे।

लोकसंस्कृति का संगम
मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि लोक संस्कृति का भी अद्भुत संगम देखने को मिला। स्थानीय कलाकारों ने जौनसारी लोकनृत्य और ढोल-दमाऊं की थाप पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस उत्सव में झूमता नजर आया।

भद्रराज मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश नौटियाल ने कहा— “भद्रराज मेला उत्तराखंड की आत्मा से जुड़ा पर्व है। यह प्रकृति, परंपरा और पुराण का संगम है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखता है।”

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