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Alavida Hyoog Gaintjar:मसूरी ने खोया अपना ‘वैश्विक ब्रांड एंबेसडर’; पद्मश्री और मशहूर ट्रैवल राइटर का 94 वर्ष की उम्र में निधन

मसूरी/देहरादून (3 फरवरी 2026): पहाड़ों की रानी मसूरी आज गमगीन है। भारत को अपनी लेखनी के जरिए दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले दिग्गज ट्रैवल राइटर और पद्मश्री से सम्मानित ह्यूग गैंट्जर (Hugh Gantzer) का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने अपने निवास ‘ओक ब्रुक’ (किंक्रेग …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 03 फ़र, 2026
Alavida Hyoog Gaintjar:मसूरी ने खोया अपना ‘वैश्विक ब्रांड एंबेसडर’; पद्मश्री और मशहूर ट्रैवल राइटर का 94 वर्ष की उम्र में निधन

मसूरी/देहरादून (3 फरवरी 2026): पहाड़ों की रानी मसूरी आज गमगीन है। भारत को अपनी लेखनी के जरिए दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले दिग्गज ट्रैवल राइटर और पद्मश्री से सम्मानित ह्यूग गैंट्जर (Hugh Gantzer) का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने अपने निवास ‘ओक ब्रुक’ (किंक्रेग लाइब्रेरी रोड) में अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल साहित्य जगत बल्कि पर्यावरण संरक्षण के एक युग का अंत हो गया है।

 

नेवी कमांडर से कलम के जादूगर तक का सफर ह्यूग गैंट्जर का जीवन असाधारण रहा। भारतीय नौसेना में कमांडर के रूप में देश की सेवा करने के बाद, उन्होंने अपनी पत्नी कोलीन गैंट्जर के साथ मिलकर ट्रैवल राइटिंग की दुनिया में कदम रखा।

अनोखा समझौता: एक इंटरव्यू में ह्यूग ने बताया था, “मैं यात्रा करना चाहता था और कोलीन को लिखना पसंद नहीं था, लेकिन वह यात्रा करना चाहती थीं। समझौता हुआ- मैंने यात्रा शुरू की और कोलीन लिखने को राजी हो गईं।”

 इस जोड़ी ने मिलकर 30 से ज्यादा पुस्तकें, हजारों लेख लिखे और दूरदर्शन के लिए 52 डॉक्यूमेंट्री बनाईं। उनके योगदान के लिए उन्हें 2025 में गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री से नवाजा गया था।

मसूरी के पर्यावरण रक्षक: इंदिरा गांधी तक पहुंचाई थी आवाज ह्यूग गैंट्जर सिर्फ एक लेखक नहीं, बल्कि मसूरी के सच्चे प्रहरी थे।

  • खनन के खिलाफ जंग: जब मसूरी के पहाड़ चूना खनन से छलनी हो रहे थे, तब गैंट्जर ने ही सबसे मुखर आवाज उठाई थी। उनके प्रयासों के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खनन पर रोक लगाई थी।

  • निगरानी: वे सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य रहे और अनियंत्रित निर्माण से शहर को बचाने के लिए अंत तक लड़ते रहे।

पिता भी रहे थे मसूरी के प्रशासक ह्यूग का मसूरी से रिश्ता पीढ़ियों पुराना था। उनका जन्म 1931 में पटना में हुआ, लेकिन पढ़ाई मसूरी के हैम्पटन कोर्ट और सेंट जॉर्ज कॉलेज से हुई। उनके पिता जेएफ गैंट्जर ब्रिटिश काल (1941-43) में मसूरी नगर पालिका के प्रशासक एवं चेयरमैन रहे थे।

एक साल के भीतर बिछड़ गई यह ऐतिहासिक जोड़ी ह्यूग अपनी पत्नी कोलीन के बिना अधूरे थे। कोलीन का निधन 6 नवंबर 2024 को हुआ था। पत्नी के जाने के कुछ महीने बाद ही ह्यूग भी अनंत यात्रा पर चले गए। उनका अंतिम संस्कार बुधवार सुबह कैमल्स बैक कब्रिस्तान में किया जाएगा। प्रसिद्ध इतिहासकार गणेश शैली ने शोक जताते हुए कहा, “उनके जाने से मसूरी सचमुच गरीब हो गई है।”

 

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