Menu
#Mumbai

दो दिन तक हाई अलर्ट के बीच मुख्यमंत्री ने खुद संभाली कमान

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब तक अपने तेज फैसलों और सख्त प्रशासनिक शैली के कारण “धाकड़” और “धुरंधर” जैसे विशेषणों से पहचाने जाते रहे हैं। लेकिन कर्णप्रयाग विवाद के दौरान जिस संयम, धैर्य और संवाद आधारित रणनीति के साथ उन्होंने पूरे घटनाक्रम को संभाला, उससे …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 28 जून, 2026
दो दिन तक हाई अलर्ट के बीच मुख्यमंत्री ने खुद संभाली कमान

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब तक अपने तेज फैसलों और सख्त प्रशासनिक शैली के कारण “धाकड़” और “धुरंधर” जैसे विशेषणों से पहचाने जाते रहे हैं। लेकिन कर्णप्रयाग विवाद के दौरान जिस संयम, धैर्य और संवाद आधारित रणनीति के साथ उन्होंने पूरे घटनाक्रम को संभाला, उससे उनकी एक नई पहचान “धैर्यवान धामी” के रूप में भी उभरकर सामने आई।

दो दिनों तक प्रदेश हाई अलर्ट पर रहा, लेकिन मुख्यमंत्री ने पूरी स्थिति की कमान स्वयं संभाले रखी। वे लगातार पुलिस मुख्यालय, शासन, केंद्र सरकार, पंजाब सरकार तथा सिख समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों के संपर्क में रहे। अकाल तख्त के साथ भी संवाद के सभी माध्यम खुले रखे गए, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी न पनपे और धार्मिक भावनाएं आहत न हों। सरकार का स्पष्ट संदेश था कि कानून अपना काम करेगा, लेकिन किसी भी समुदाय की आस्था और सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं होगा।

 

धामी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह भी थी कि कर्णप्रयाग की घटना का असर चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा पर किसी भी रूप में न पड़े। दोनों यात्राएं उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार हैं। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के साथ-साथ संवाद की प्रक्रिया भी लगातार जारी रखी गई।

 

सूत्रों के अनुसार, इसी रणनीति के तहत सिख समुदाय से जुड़े प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निहंग प्रतिनिधियों से वार्ता की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई। उद्देश्य था तनाव को बढ़ने से रोकना, विश्वास बनाए रखना और पूरे मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालना।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री धामी की नेतृत्व शैली का एक अलग पक्ष सामने रखा। सख्त प्रशासनिक फैसलों के लिए चर्चित धामी ने इस बार धैर्य, संवाद और संतुलन के जरिए हालात संभालते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया कि संकट की घड़ी में दृढ़ता और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं।

Tagged:
Share This Article