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ईरान के परमाणु केंद्र पर हमला, जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी दूतावास और कंसोलेट को बनाया निशाना.

दुबई/तेहरान: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग अब अपने पांचवें दिन में प्रवेश कर चुकी है और हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बीच ईरान ने भी अब अपने जवाबी हमलों की धार तेज कर दी है। ताजा घटनाक्रम में न …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 04 मा, 2026
ईरान के परमाणु केंद्र पर हमला, जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी दूतावास और कंसोलेट को बनाया निशाना.

दुबई/तेहरान: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग अब अपने पांचवें दिन में प्रवेश कर चुकी है और हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बीच ईरान ने भी अब अपने जवाबी हमलों की धार तेज कर दी है। ताजा घटनाक्रम में न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि राजनयिक परिसरों और ऊर्जा ढांचों को भी युद्ध की आग में झोंक दिया गया है।

ईरान के परमाणु केंद्र पर हमला, जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी दूतावास और कंसोलेट को बनाया निशाना

नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमला

खबरों के मुताबिक, इजराइल और अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया है। हालांकि, ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि इस हमले से किसी भी प्रकार का रेडियोधर्मी (Radioactive) रिसाव नहीं हुआ है। इसके अलावा तेहरान के पश्चिमी हिस्से में भारी बमबारी की गई है, जिससे पूरे शहर में धुएं का गुबार देखा गया।

ईरान का प्रचंड पलटवार: 500 मिसाइलें और 2000 ड्रोन

अमेरिकी एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, ईरान ने अब तक 500 से ज्यादा बैलेस्टिक मिसाइलें और लगभग 2000 ड्रोन दागे हैं।

  • दुबई: यहाँ अमेरिकी कंसोलेट के पास भीषण आग लगने की खबर है।

  • सऊदी अरब: रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर दो ड्रोन गिरे हैं।

  • कुवैत: एक सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में 4 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है, जिससे अब तक मरने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या 6 पहुंच गई है।

खाड़ी देशों में दहशत का माहौल

जंग की आंच अब कतर, ओमान और यूएई तक फैल गई है:

  • कतर: दोहा के आसमान में कई धमाके सुने गए। कतर के एयर डिफेंस ने कई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। साथ ही, ईरान की खुफिया एजेंसी IRGC के लिए काम करने के शक में 10 जासूसों को गिरफ्तार किया गया है।

  • ओमान: यहाँ अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और बाहर न निकलने की चेतावनी दी है।

  • लेबनान और इजराइल: इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के 60 ठिकानों को तबाह करने का दावा किया है, जिसमें 50 लोगों की मौत हुई है। वहीं हिजबुल्ला ने भी उत्तरी इजराइल और हाइफा नौसैनिक अड्डे पर रॉकेट दागे हैं।


ट्रंप का बयान: “लक्ष्य सत्ता परिवर्तन नहीं”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि ईरान को भारी नुकसान उठाना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन करना नहीं है, बल्कि यह हमला इसलिए किया गया क्योंकि ईरान पहले हमला करने की फिराक में था। हालांकि, ट्रंप को अपने ही देश और सहयोगियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है:

  1. ब्रिटेन का इनकार: पीएम कीर स्टारमर ने इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं किया और डियागो गार्सिया बेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से मना कर दिया।

  2. अमेरिकी सीनेट: अब ‘वॉर पावर एक्ट’ के तहत वोटिंग होगी, जिससे तय होगा कि ट्रंप के पास इस युद्ध को जारी रखने का संवैधानिक अधिकार है या नहीं।

मानवीय संकट और रेस्क्यू ऑपरेशन

जंग के चार दिनों के भीतर ईरान में करीब 800 और लेबनान में 50 लोगों की जान जा चुकी है। श्रीलंका की नौसेना ने ईरानी जहाज के क्रू मेंबर्स को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, जिसमें 32 लोगों को बचाया गया है, लेकिन कुछ शव भी बरामद हुए हैं। चेक गणराज्य जैसे देश अपने नागरिकों को निकालने के लिए विशेष विमान भेज रहे हैं।

निष्कर्ष: मिडिल ईस्ट में हालात अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं। ऊर्जा केंद्रों और राजनयिक केंद्रों पर हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।

 

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