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चमोली के थेंग गांव में भालू का आतंक बढ़ा, गोशाला तोड़कर पशुधन को बनाया शिकार

चमोली: जनपद चमोली के थेंग गांव में भालुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ताजा घटना में एक भालू ने गांव निवासी मोहन सिंह नेगी की गोशाला की छत फाड़ दी और अंदर बंधे पशुधन व बकरियों को अपना निवाला बना लिया। …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 29 दिस्, 2025
चमोली के थेंग गांव में भालू का आतंक बढ़ा, गोशाला तोड़कर पशुधन को बनाया शिकार

चमोली: जनपद चमोली के थेंग गांव में भालुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ताजा घटना में एक भालू ने गांव निवासी मोहन सिंह नेगी की गोशाला की छत फाड़ दी और अंदर बंधे पशुधन व बकरियों को अपना निवाला बना लिया। इस हमले से पीड़ित परिवार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

घटना रविवार देर रात की बताई जा रही है। भालू ने अचानक गोशाला पर हमला कर दिया और भीतर बंधी दुधारू गायों व बकरियों को मार डाला। सुबह जब परिवार को घटना की जानकारी मिली तो गोशाला में खून फैला हुआ था और पशुधन मृत अवस्था में पड़ा मिला। पशुपालन और बकरी पालन ही परिवार की आजीविका का मुख्य साधन था, ऐसे में इस नुकसान से परिवार पूरी तरह टूट गया है।

थेंग क्षेत्र पंचायत सदस्य रमा देवी ने बताया कि गांव और आसपास के इलाकों में पिछले कई महीनों से भालुओं की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। आए दिन पशुधन पर हमले हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण भय के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे नुकसान के बावजूद अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

वहीं क्षेत्र के जनप्रतिनिधि धन सिंह ने बताया कि थेंग गांव समेत आसपास के दूरस्थ गांवों में भालुओं का आतंक चरम पर है। दुधारू पशु और बकरियां ग्रामीणों की आय का एकमात्र साधन हैं, लेकिन भालुओं के हमलों से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही आक्रामक भालुओं को पकड़कर आबादी वाले इलाकों से दूर नहीं किया गया, तो ग्रामीण मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

इधर, ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र और भालू प्रभावित इलाकों में नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन की क्यूआरटी टीम भालू प्रबंधन कॉन्सेप्ट के तहत कार्य कर रही है। पार्क प्रशासन का कहना है कि भालुओं को आबादी से दूर रखने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त की जा रही है। हालांकि, दूरस्थ गांवों में बार-बार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से मुआवजा देने के साथ-साथ स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके और ग्रामीणों की आजीविका सुरक्षित रह सके।

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