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एसआईआर से पहले उत्तराखंड के 90 हजार मतदाताओं को लेना होगा बड़ा फैसला

देहरादून: उत्तराखंड में चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए जाने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) से पहले करीब 90 हजार मतदाताओं को अहम फैसला लेना होगा। निर्वाचन कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में दर्ज हैं, उन्हें अनिवार्य …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 23 दिस्, 2025
एसआईआर से पहले उत्तराखंड के 90 हजार मतदाताओं को लेना होगा बड़ा फैसला

देहरादून: उत्तराखंड में चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए जाने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) से पहले करीब 90 हजार मतदाताओं को अहम फैसला लेना होगा। निर्वाचन कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में दर्ज हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से एक स्थान का वोट हटवाना होगा, अन्यथा भविष्य में कानूनी और निर्वाचन संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, एसआईआर शुरू होने से पहले प्री-एसआईआर गतिविधियों के तहत मतदाताओं की मैपिंग का कार्य किया जा रहा है। इसी दौरान यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम दो अलग-अलग श्रेणियों या स्थानों की वोटर लिस्ट में दर्ज हैं

प्रदेश में एक जनवरी 2025 को जारी मतदाता सूची के अनुसार उत्तराखंड में कुल 89,812 सर्विस मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें 87,103 पुरुष और 2,709 महिला मतदाता शामिल हैं। ये वे मतदाता हैं जो वर्तमान में सेना या अर्धसैनिक बलों में सेवाएं दे रहे हैं और जिनका नाम सर्विस वोटर के रूप में दर्ज है।

निर्वाचन कार्यालय ने ऐसे सभी सर्विस मतदाताओं से अपील की है कि वे यह तय करें कि वे सर्विस मतदाता के रूप में मतदान करना चाहते हैं या अपने गृह जनपद/ग्राम की सामान्य मतदाता सूची में बने रहना चाहते हैं। दोनों जगह नाम दर्ज रहना नियमों के विरुद्ध है और एसआईआर के दौरान ऐसे नाम स्वतः चिन्हित कर हटाए जा सकते हैं।

इसके अलावा, ऐसे सामान्य मतदाता भी आयोग के रडार पर हैं जिनके नाम शहर और गांव दोनों की मतदाता सूची में दर्ज हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि एक व्यक्ति का केवल एक ही मतदाता पहचान मान्य होगा और दोहरी प्रविष्टि पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकती है।

अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि आगामी चुनावों में किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो। मतदाताओं से अपील की गई है कि वे समय रहते अपने वोट की स्थिति की जांच करें और यदि दोहरी प्रविष्टि हो तो स्वयं आवेदन कर एक नाम हटवाएं।

निर्वाचन विभाग का मानना है कि समय पर निर्णय न लेने की स्थिति में मतदाता अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और मतदान के दौरान नाम कटने जैसी समस्या भी सामने आ सकती है।

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