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उत्तराखंड में परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन: देहरादून समेत तीन शहरों में लागू हुआ PUC 2.0; स्कूली बसों पर भी चला डंडा.

देहरादून। उत्तराखंड में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग ने दो बड़े कदम उठाए हैं। एक ओर जहां देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए PUC वर्जन 2.0 लागू कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर देहरादून में …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 25 फ़र, 2026
उत्तराखंड में परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन: देहरादून समेत तीन शहरों में लागू हुआ PUC 2.0; स्कूली बसों पर भी चला डंडा.

देहरादून। उत्तराखंड में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग ने दो बड़े कदम उठाए हैं। एक ओर जहां देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए PUC वर्जन 2.0 लागू कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर देहरादून में नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर भारी संख्या में चालान और जब्ती की कार्रवाई की गई है।

प्रदूषण पर डिजिटल प्रहार: अब नहीं चलेंगे फर्जी प्रमाणपत्र

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा देहरादून, काशीपुर और ऋषिकेश को ‘नॉन-अटेनमेंट सिटीज’ (वे शहर जहाँ वायु गुणवत्ता मानक से कम है) घोषित किए जाने के बाद विभाग ने PUC (Pollution Under Control) वर्जन 2.0 को अनिवार्य कर दिया है।

क्या है PUC 2.0 और इसके लाभ?

  • पारदर्शिता: नए सिस्टम के तहत प्रदूषण जांच की पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी होगी।

  • फर्जीवाड़े पर रोक: मैन्युअल हस्तक्षेप कम होने से फर्जी प्रमाणपत्र जारी करना नामुमकिन होगा।

  • रियल-टाइम मॉनिटरिंग: वाहनों के उत्सर्जन डेटा की निगरानी अब सीधे विभाग द्वारा वास्तविक समय में की जा सकेगी।

परिवहन विभाग ने वाहन स्वामियों से अपील की है कि वे पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करते हुए समय पर अपने वाहनों की जांच नए मानकों के अनुरूप कराएं।


स्कूली वाहनों पर चला चाबुक: 42 वाहन सीज, 355 के चालान

राजधानी देहरादून में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखने वाले वाहन स्वामियों के खिलाफ परिवहन विभाग ने 24 और 25 फरवरी को सघन चेकिंग अभियान चलाया। आरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. अनीता चमोला के निर्देशन और एआरटीओ पंकज श्रीवास्तव के नेतृत्व में चली इस कार्रवाई ने स्कूल प्रबंधन और वैन चालकों में हड़कंप मचा दिया।

दो दिवसीय अभियान का रिपोर्ट कार्ड: | विवरण | संख्या | | :— | :— | | कुल जांचे गए वाहन | लगभग 1450 | | कुल चालान | 355 | | कुल सीज किए गए वाहन | 42 | | सीज की गई स्कूल बसें/वैन | 29 |

चेकिंग में मिलीं ये गंभीर खामियां: टीम ने आशारोड़ी, आईएसबीटी, रिस्पना, नेहरू कॉलोनी और राजपुर रोड जैसे क्षेत्रों में जांच की, जहाँ अधिकांश स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई:

  1. पैनिक बटन का न होना।

  2. सीसीटीवी कैमरों और अग्निशमन यंत्रों (Fire Extinguishers) का अभाव।

  3. बस/वैन में महिला परिचारिका या सहायक की अनुपस्थिति।

  4. क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना (ओवरलोडिंग)।


विभाग की चेतावनी

अभियान में शामिल अधिकारियों (एम.डी. पपनई, श्वेता रौथाण, प्रज्ञा पंत व अन्य) ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। परिवहन विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों व वाहन स्वामियों के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

 

 

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