Menu
#Mumbai

सुरक्षा में बड़ी चूक: बिना इनर लाइन परमिट के आदि कैलाश पहुंचे पर्यटक, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश.

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में स्थित प्रसिद्ध आदि कैलाश धाम की सुरक्षा व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब कुछ पर्यटकों के बिना इनर लाइन परमिट (ILP) के वहां पहुंचने का मामला सामने आया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 14 अप्र, 2026
सुरक्षा में बड़ी चूक: बिना इनर लाइन परमिट के आदि कैलाश पहुंचे पर्यटक, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश.

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में स्थित प्रसिद्ध आदि कैलाश धाम की सुरक्षा व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब कुछ पर्यटकों के बिना इनर लाइन परमिट (ILP) के वहां पहुंचने का मामला सामने आया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

सुरक्षा में बड़ी चूक: बिना इनर लाइन परमिट के आदि कैलाश पहुंचे पर्यटक, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

वीडियो वायरल होने के बाद मची खलबली

जानकारी के अनुसार, सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें पर्यटक आदि कैलाश के दर्शन करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो 12 अप्रैल का है। चूँकि आधिकारिक तौर पर इस वर्ष की आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू होनी है, ऐसे में यात्रा शुरू होने से पहले ही पर्यटकों का वहां पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा कर रहा है।

छियालेख: सुरक्षा का महत्वपूर्ण पड़ाव

चीन सीमा के अत्यंत निकट स्थित होने के कारण आदि कैलाश और ओम पर्वत क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं।

  • इनर लाइन: छियालेख को प्रशासन ने ‘इनर लाइन’ घोषित किया है।

  • अनिवार्यता: इस बिंदु से आगे जाने के लिए हर नागरिक के पास वैध ‘इनर लाइन परमिट’ होना अनिवार्य है।

  • सुरक्षा: यहाँ आईटीबीपी (ITBP) का चेक पोस्ट है, जहाँ हर आने-जाने वाले के दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाती है।

स्थानीय लोगों और टूर ऑपरेटरों में रोष

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और जिम्मेदार टूर ऑपरेटरों ने नाराजगी जाहिर की है। स्थानीय टूर ऑपरेटर प्रदीप ह्याकी का कहना है कि:

“यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। बिना परमिट के लोगों का वहां पहुंचना एक गंभीर मामला है। नियमों को ताक पर रखने वाले टूर ऑपरेटरों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

प्रशासन का रुख: 5 दिन में मांगी रिपोर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए धारचूला के उपजिलाधिकारी (SDM) आशीष जोशी ने तत्काल प्रभाव से आईटीबीपी को जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि:

  1. आईटीबीपी से उन पर्यटकों का पूरा विवरण 5 दिन के भीतर मांगा गया है।

  2. यह पता लगाया जा रहा है कि सुरक्षा घेरा तोड़कर या बिना जांच के ये लोग आगे कैसे बढ़े।

  3. जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों और संबंधित टूर ऑपरेटरों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आदि कैलाश का महत्व

आदि कैलाश को ‘छोटा कैलाश’ या ‘शिव कैलाश’ भी कहा जाता है और इसे भगवान शिव के पंच कैलाशों में से एक माना जाता है। व्यास घाटी में स्थित इस पवित्र स्थल तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को धारचूला, गुंजी और जोलिंगकोंग से होकर गुजरना पड़ता है। हाल के वर्षों में सड़क मार्ग बनने के बाद यहाँ पहुंचना सुगम हुआ है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहाँ बिना परमिट और मेडिकल जांच के जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

 

Tagged:
Share This Article