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क्या बिना तलाक कर सकते हैं दूसरी शादी ?

क्या बिना तलाक कर सकते हैं दूसरी शादी ? : लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को परिवार व पार्टी (राजद) से बेदखल कर दिया है। दरअसल, बिहार में इस सात के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस घमासान का कारण तेज …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 28 मई, 2025
क्या बिना तलाक कर सकते हैं दूसरी शादी ?

क्या बिना तलाक कर सकते हैं दूसरी शादी ? : लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को परिवार व पार्टी (राजद) से बेदखल कर दिया है। दरअसल, बिहार में इस सात के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस घमासान का कारण तेज प्रताप और अनुष्का यादव की सोशल मीडिया पर वायरल कुछ तस्वीरें व वीडियो हैं। दोनों फोटो में एक-दूसरे के प्यार में और बेहद करीब नजर आ रहे हैं। कुछ फोटो में तो अनुष्का ने मांग में सिंदूर भी भरा हुआ है। हालांकि इस सब के बाद तेज प्रताप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के हैक करने की बात कही। वहीं, तेज प्रताप के भाई तेजस्वी यादव और अनुष्का के भाई आकाश यादव ने दोनों के बालिग होने और उनका निजी मामला होने का बयान देकर पूरे प्रकरण से अपना पल्ला ही झाड़ लिया है।

इस सब के बीच यहां सवाल ये उठ रहा है कि तेज प्रताप यादव पहले से शादीशुदा हैं। उनका अपनी पहली पत्नी ऐश्वर्या यादव से तलाक का केस कोर्ट में विचाराधीन है, तो क्या तेज प्रताप तलाक लिए बिना दूसरी शादी कर सकते हैं? अगर तेज प्रताप या इंडिया में कोई शख्स ऐसा कर लेता है तो क्या ये रिश्ता कानून में मान्य होगा? आइए आपको इस खबर में इंडिया में शादी और तलाक को लेकर अलग-अलग धर्म में क्या नियम हैं डिटेल में बताते हैं।

भारत में बिना तलाक लिए दूसरी शादी करना अवैध है और कानून की नजर में इसे द्विविवाह कहते हैं, जानकारी के अनुसार भारत में बिना तलाक लिए दूसरी शादी करना अवैध है और कानून की नजर में इसे द्विविवाह (Bigamy) माना जाएगा। कानून की बात करें तो BNS 82 (भारतीय न्याय संहिता) या भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 494 के तहत यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी को कानूनी रूप से खत्म किए बिना दूसरी शादी करता है, तो यह क्राइम की श्रेणी में आता है और इसके लिए 7 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

भारत में अलग-अलग धर्मों में शादी को लेकर क्या लॉ हैं।

हिंदू विह अधिनियम, 1955: हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म के अनुयायियों पर लागू होता है। जब तक पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त नहीं होती, दूसरी शादी अवैध मानी जाती है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत), 1937: मुस्लिम पुरुषों को चार शादियां करने की अनुमति है, लेकिन यदि कोई हिंदू व्यक्ति सिर्फ दूसरी शादी करने के लिए इस्लाम धर्म अपनाता है, तो यह भी अवैध माना जाएगा।

क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872 और पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट, 1936: इन धर्मों में भी बिना तलाक दूसरी शादी अवैध है

स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954: यदि किसी व्यक्ति की शादी इस अधिनियम के तहत हुई है, तो उसे दूसरी शादी करने से पहले तलाक लेना अनिवार्य है।

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