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चलती रोडवेज बस का स्टीयरिंग फेल, ड्राइवर की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा.

रामनगर: रामनगर में मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जब चलती रोडवेज बस का स्टीयरिंग अचानक फेल हो गया। चालक की सतर्कता और सूझबूझ से बस को समय रहते रोक लिया गया, जिससे उसमें सवार 30 से अधिक यात्रियों की जान बच गई। कैसे हुआ हादसा टलने …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 25 मा, 2026
चलती रोडवेज बस का स्टीयरिंग फेल, ड्राइवर की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा.

रामनगर: रामनगर में मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जब चलती रोडवेज बस का स्टीयरिंग अचानक फेल हो गया। चालक की सतर्कता और सूझबूझ से बस को समय रहते रोक लिया गया, जिससे उसमें सवार 30 से अधिक यात्रियों की जान बच गई।

चलती रोडवेज बस का स्टीयरिंग फेल, ड्राइवर की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

कैसे हुआ हादसा टलने का मामला

जानकारी के अनुसार उत्तराखंड रोडवेज की अल्मोड़ा डिपो की बस (संख्या UK 07 PA 2800) सुबह यात्रियों को लेकर रवाना हुई थी और दोपहर करीब 1:30 बजे रामनगर पहुंची। यहां से सवारियां लेकर बस हरिद्वार के लिए निकल गई।

अचानक फेल हुआ स्टीयरिंग

बस चालक नंदन सिंह के मुताबिक, हरिद्वार-रामनगर हाईवे पर टांडा के पास बस करीब 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। तभी अचानक स्टीयरिंग ने काम करना बंद कर दिया और बस अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतरने लगी।

स्थिति को भांपते हुए चालक ने तुरंत ब्रेक लगाकर बस को सड़क किनारे रोक दिया। उस समय बस का स्टीयरिंग पूरी तरह फेल हो चुका था।

यात्रियों में मची अफरा-तफरी

अचानक बस रुकने से यात्रियों में हड़कंप मच गया। सभी लोग घबराकर बस से नीचे उतर आए। बस में 30 से ज्यादा यात्री सवार थे, जिनमें अधिकांश हरिद्वार और काशीपुर जाने वाले थे।

यात्रियों ने लगाए लापरवाही के आरोप

यात्रियों का आरोप है कि बस को अल्मोड़ा से रवाना करने से पहले उसकी ठीक से फिटनेस जांच नहीं की गई। उनका कहना है कि इसी लापरवाही के कारण इतना बड़ा हादसा होने से बाल-बाल बचा।

प्रशासन ने किया वैकल्पिक इंतजाम

घटना के बाद रोडवेज प्रशासन हरकत में आया। रामनगर डिपो के एआरएम नवीन आर्य ने बताया कि सभी यात्रियों को दूसरी बस से उनके गंतव्य तक सुरक्षित भेज दिया गया है। साथ ही मामले की सूचना अल्मोड़ा डिपो अधिकारियों को दे दी गई है।

फिटनेस जांच पर उठे सवाल

हालांकि चालक की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और बसों की फिटनेस जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहाड़ी मार्ग पर ऐसी घटना होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।

 

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