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चारधाम यात्रा 2026: ऋषिकेश में महामंथन, 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के लिए तैयार हो रहा ‘एडवांस रोडमैप’

ऋषिकेश: देवभूमि उत्तराखंड में साल 2026 की चारधाम यात्रा को ऐतिहासिक और सुगम बनाने के लिए शासन-प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है। यात्रा शुरू होने में अभी वक्त है, लेकिन तैयारियों का शंखनाद हो चुका है। शनिवार को ऋषिकेश स्थित चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में एक उच्च स्तरीय …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 17 जन, 2026
चारधाम यात्रा 2026: ऋषिकेश में महामंथन, 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के लिए तैयार हो रहा ‘एडवांस रोडमैप’

ऋषिकेश: देवभूमि उत्तराखंड में साल 2026 की चारधाम यात्रा को ऐतिहासिक और सुगम बनाने के लिए शासन-प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है। यात्रा शुरू होने में अभी वक्त है, लेकिन तैयारियों का शंखनाद हो चुका है। शनिवार को ऋषिकेश स्थित चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में एक उच्च स्तरीय बैठक (High-Level Meeting) आयोजित की गई, जिसमें गढ़वाल मंडल के शीर्ष अधिकारियों ने शिरकत की।

कमिश्नर और आईजी ने संभाली कमान इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने की। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप भी विशेष रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा, गढ़वाल मंडल के सभी संबंधित जिलों के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस के आला अधिकारी भी इस महामंथन का हिस्सा बने।

पिछली गलतियों से सीख, नई यात्रा की तैयारी बैठक का मुख्य उद्देश्य यात्रा प्रबंधन एवं नियंत्रण संगठन (Yatra Management & Control Organization) को सुदृढ़ करना था। कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने स्पष्ट किया कि पिछली यात्रा के अनुभवों के आधार पर ही 2026 का रोडमैप तैयार किया जाएगा। बैठक में इन प्रमुख बिंदुओं पर फोकस किया गया:

  1. समीक्षा और सुधार: पिछली यात्रा में कौन सी व्यवस्थाएं सफल रहीं और कहां कमियां छूटीं, इस पर बारीक मंथन किया गया।

  2. इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर: यात्रा मार्गों की मौजूदा स्थिति, सड़कों और पुलों की मरम्मत, और पार्किंग की समस्याओं को समय रहते सुलझाने के निर्देश दिए गए।

  3. बुनियादी सुविधाएं: स्वास्थ्य सेवाओं, एंबुलेंस की उपलब्धता, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाने पर चर्चा हुई।

  4. आपदा प्रबंधन: आईजी और कमिश्नर ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों और किसी भी आपात स्थिति (Emergency) में त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response) की रणनीति बनाने पर जोर दिया।

सभी पक्षकारों (Stakeholders) की राय अहम इस बार प्रशासन केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रा से जुड़े हर वर्ग को साथ लेकर चल रहा है। बैठक में तीर्थ पुरोहितों, होटल एसोसिएशन, डंडी-कंडी संचालकों, चॉपर (हेलीकॉप्टर) कंपनियों और ट्रांसपोर्ट यूनियनों के प्रतिनिधियों से भी फीडबैक लिया गया। जिला स्तर से भी प्रस्ताव मांगे गए हैं ताकि जमीनी हकीकत के हिसाब से फैसले लिए जा सकें।

भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती गौरतलब है कि पिछली चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड 50 लाख से अधिक श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचे थे। अनुमान लगाया जा रहा है कि 2026 में यह आंकड़ा इससे भी ऊपर जा सकता है। ऐसे में ‘क्राउड मैनेजमेंट’ (भीड़ नियंत्रण) प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता है। आईजी गढ़वाल ने सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारियों को अभी से गंभीर होने के निर्देश दिए हैं।

 

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