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लोकसभा में वोटर लिस्ट पर उठा विवाद, राहुल गांधी ने की चर्चा की मांग

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की कार्यवाही के दौरान लोकसभा में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा मुद्दा उठा। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा, “पूरे देश में वोटर लिस्ट …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 10 मा, 2025
लोकसभा में वोटर लिस्ट पर उठा विवाद, राहुल गांधी ने की चर्चा की मांग

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की कार्यवाही के दौरान लोकसभा में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा मुद्दा उठा। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा, “पूरे देश में वोटर लिस्ट पर सवाल उठ रहे हैं। सभी विपक्षी दल इस पर चिंता जता रहे हैं, इसलिए इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए।”

विपक्ष ने मतदाता सूची की गड़बड़ियों पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने कहा, “हम सरकार की इस बात को स्वीकार करते हैं कि वह मतदाता सूची तैयार नहीं करती, लेकिन पूरे देश में इस सूची पर सवाल उठाए जा रहे हैं। महाराष्ट्र समेत हर राज्य में विपक्ष एक स्वर में इस पर चर्चा की मांग कर रहा है।”

वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा, “चुनाव आयोग सरकार के हाथ में है। अगर लोकतंत्र इसी तरह चलता रहा और आयोग सरकार की पैरवी करता रहा, तो चुनावों के नतीजे पहले से ही तय माने जाएंगे।”

टीएमसी ने भी जताई आपत्ति, चुनाव आयोग से जवाब मांगने की अपील

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता सौगत रॉय ने भी मतदाता सूची में खामियों का मुद्दा उठाया और कहा कि “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही इस पर सवाल उठा चुकी हैं। उन्होंने मुर्शिदाबाद और बर्दवान में एक ही EPI (चुनावी फोटो पहचान पत्र) संख्या वाले मतदाताओं की मौजूदगी का खुलासा किया है।”

टीएमसी ने यह भी कहा कि उनका एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करेगा और मतदाता सूचियों में व्यापक संशोधन की मांग करेगा, खासतौर पर अगले साल पश्चिम बंगाल और असम में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले।

“चुनाव आयोग को देश को जवाब देना चाहिए” – सौगत रॉय

सौगत रॉय ने लोकसभा में कहा, “महाराष्ट्र और हरियाणा में वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं। अब यह समस्या पश्चिम बंगाल और असम तक पहुंच गई है। चुनाव आयोग को देश को जवाब देना चाहिए कि मतदाता सूचियों में ये गलतियां क्यों हुईं।”

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