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उत्तराखंड में जोशीमठ सिंहधार में दरारों से प्रभावित टूटा मक़ान, मकान की छत भरभराकर गिरि, अन्य आवासीय मकान व गोशाला को भी खतरा पैदा:

दिनेश लाल ने यह मकान बीते 3 जनवरी को ही मकान छोड़ दिया था, अब जिस मकान में शरण ली वहाँ भी दरारे आने हुई शुरू। जोशीमठ के सिंहधार में दरारों से प्रभिवित एक मकान की छत टूट गई हैं, और उस घर का आंगन भी काफी धंस गया हैं। …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 23 जन, 2023
उत्तराखंड में जोशीमठ सिंहधार में दरारों से प्रभावित टूटा मक़ान, मकान की छत भरभराकर गिरि, अन्य आवासीय मकान व गोशाला को भी खतरा पैदा:

दिनेश लाल ने यह मकान बीते 3 जनवरी को ही मकान छोड़ दिया था, अब जिस मकान में शरण ली वहाँ भी दरारे आने हुई शुरू।

जोशीमठ के सिंहधार में दरारों से प्रभिवित एक मकान की छत टूट गई हैं, और उस घर का आंगन भी काफी धंस गया हैं।

एक अन्य आवासीय मकान व गोशाला को भी खतरा पैदा हो गया हैं। वहाँ रहने वाले परिवारों को पहले ही प्रशासन द्वारा प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट किया हैं।

सिंहधार जोशीमठ में रविवार को निवासी देनेश लाल का आवासीय मकान टूट कर गिर गया हैं, दिनेश लाल की मकान की छत भरभराकर ढह गई हैं।

दिनेश लाल ने 3 जनवरी को यह मकान छोड़ दिया था लेकिन अब जिस मकान पर वह रह रहे हैं, वहाँ भी अब दरारे आने शुरू हो गई हैं।
सिंहधार में शिवलाल एवं अन्य लोगों के आवासीय मकान भी दरारों से बुरी से नष्ट हो चुके हैं।

जोशीमठ में प्रभावितों को शासन एवं प्रशासन द्वारा प्राथमिक विद्यालय सिंहधार और मिलन केंद्र एवं सभी स्थानों किया गया हैं।

प्रभावित शिव लाल ने बताया की इस पूरे क्षेत्र में दरारे तेजी से बढ़ रही हैं।

जोशीमठ में दरारों से नष्ट हो चुके मकानों के नीचे व दाई तरफ के खेतों में भी दो से ढाई फिट तक गहरी दरारे पढ़ गयी हैं ।

प्रभावित मुकेश कुमार के आवासीय मकान का एक हिस्सा दरारों से बुरी तरह प्रभावित हो गया हैं।

इन सभी मकानों को पूरी तरह से खाली कर समान किसी मित्र के घर में रखा हुआ हैं।

जोशीमठ में भू-धंसाव की चपेट में आया गोशाला:

जोशीमठ के सिंहधार में प्रभावित निवासी विश्वेश्वरी देवी ने बताया कि उनका घर दरारों से टूट गया हैं, और प्रशासन ने उन्हें शिविर में ठहराया हुआ हैं, उर उनके चार गाय-बछिया भी हैं।

जिनकी सुरक्षा के कोई इंतेजाम नहीं हुआ हैं, और गोशाला कि भी भू-धंसाव कि चपेट में आ गई हैं, दिन तो जैसे-तैसे पशुओं कि देखरेख हो पा रही है।
अब रात को अगर कुछ हो गया तो बेजुमन पशुओं को कौन बचाएगा।

 

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