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तेलंगाना में 400 एकड़ जंगल की कटाई: पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरा , सरकार और विरोधियों के बीच टकराव

हैदराबाद के आईटी हब गाचीबोवली में 400 एकड़ हरित क्षेत्र की नीलामी को लेकर राज्य सरकार और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली तेलंगाना सरकार इस भूमि पर आईटी पार्क और अन्य परियोजनाओं के विकास को आगे बढ़ा रही है, जबकि …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 03 अप्र, 2025
तेलंगाना में 400 एकड़ जंगल की कटाई: पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरा , सरकार और विरोधियों के बीच टकराव

हैदराबाद के आईटी हब गाचीबोवली में 400 एकड़ हरित क्षेत्र की नीलामी को लेकर राज्य सरकार और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली तेलंगाना सरकार इस भूमि पर आईटी पार्क और अन्य परियोजनाओं के विकास को आगे बढ़ा रही है, जबकि हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षक, पर्यावरणविद और विपक्षी दल – भाजपा और बीआरएस – इस कदम का कड़ा विरोध कर रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण बनाम विकास

विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि यह हरित क्षेत्र साइबराबाद के फेफड़ों के रूप में कार्य करता है और यहां विभिन्न वन्यजीवों – हिरण, मोर, जंगली सूअर और कछुए – का प्राकृतिक आवास मौजूद है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जंगल को कंक्रीट के जंगल में बदलकर पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है।

हालांकि, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का तर्क है कि इस भूमि के विकास से तेलंगाना में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और लाखों नौकरियों के अवसर सृजित होंगे। उनका दावा है कि इस परियोजना से 50,000 करोड़ रुपये का निवेश और 5 लाख नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। उन्होंने इस विरोध को “राजनीतिक ड्रामा” करार देते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर परियोजना को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।

भूमि पर स्वामित्व और कानूनी लड़ाई

400 एकड़ का यह क्षेत्र हैदराबाद विश्वविद्यालय की 2,500 एकड़ भूमि का हिस्सा है, जिसे 1974 में संसद के अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय को आवंटित किया गया था। हालांकि, इस भूमि को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है।

2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने इस भूमि को आईएमजी एकेडमीज को खेल सुविधाओं के विकास के लिए आवंटित किया था। लेकिन 2006 में वाईएस राजशेखर रेड्डी सरकार ने परियोजना रद्द कर दी और इसे युवा विकास, पर्यटन और संस्कृति विभाग को सौंप दिया।

इसके बाद आईएमजी ने अदालत में मामला दायर किया, जो वर्षों तक चला। दिसंबर 2023 में रेवंत रेड्डी सरकार ने इस मामले को पुनः उठाया और मार्च 2024 में तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने भी मई 2024 में आईएमजी की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद सरकार ने भूमि पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव

तेलंगाना सरकार ने 1 जुलाई 2024 को तेलंगाना औद्योगिक अवसंरचना निगम (टीजीआईआईसी) को इस भूमि का अधिकार हस्तांतरित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह भूमि राज्य के स्वामित्व में है और इसे लेकर किसी भी प्रकार का विरोध या विवाद अदालत की अवमानना ​​मानी जाएगी।

बीआरएस नेता के टी रामा राव ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग की है, यह याद दिलाते हुए कि उन्होंने मुंबई में आरे वन के विनाश का विरोध किया था।

यह विवाद केवल पर्यावरण बनाम विकास का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक दांव-पेच भी गहराते जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार अपने विकास के एजेंडे पर अडिग रहती है या विरोध को देखते हुए इसमें कोई संशोधन करती है।

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