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देहरादून: विदेशी छात्रा से दुष्कर्म मामले में आरोपी बरी; ‘जीरो FIR’ की जांच भी निकली ‘जीरो’, कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल.

देहरादून (1 फरवरी 2026): देहरादून के एक निजी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली दक्षिण अफ्रीकी छात्रा से दुष्कर्म के हाई-प्रोफाइल मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला आया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनी शुक्ला की अदालत ने सबूतों के अभाव और पुलिस की लचर जांच के चलते दक्षिण सूडान के आरोपी …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 01 फ़र, 2026
देहरादून: विदेशी छात्रा से दुष्कर्म मामले में आरोपी बरी; ‘जीरो FIR’ की जांच भी निकली ‘जीरो’, कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल.

देहरादून (1 फरवरी 2026): देहरादून के एक निजी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली दक्षिण अफ्रीकी छात्रा से दुष्कर्म के हाई-प्रोफाइल मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला आया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनी शुक्ला की अदालत ने सबूतों के अभाव और पुलिस की लचर जांच के चलते दक्षिण सूडान के आरोपी छात्र मूसा उर्फ मोजा मोजिज लाडू जेम्स को सभी आरोपों से दोषमुक्त (बरी) कर दिया।

पुलिस की जांच पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी अदालत ने आरोपी को बरी करते हुए क्लेमेंटटाउन थाने के तत्कालीन जांच अधिकारी (IO) सब इंस्पेक्टर संजीत कुमार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए और कड़ी टिप्पणी की।

  • लापरवाही: कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने वैज्ञानिक साक्ष्यों (Scientific Evidence) को पूरी तरह नजरअंदाज किया।

  • फॉरेंसिक चूक: पीड़िता का आरोप था कि सोते समय उसके साथ दुष्कर्म हुआ। ऐसे में पुलिस को बिस्तर की चादर और कपड़ों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जांच अधिकारी ने अहम सबूत जुटाने की जहमत ही नहीं उठाई।

क्या था पूरा मामला? घटना 29 अक्टूबर 2024 की रात की बताई गई थी।

  • आरोप: पीड़िता का कहना था कि क्लेमेंटटाउन क्षेत्र में एक फेयरवेल पार्टी के बाद जब वह बेसुध होकर सो रही थी, तब आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

  • जीरो FIR: पीड़िता ने अक्टूबर 2024 में दिल्ली के कश्मीरी गेट थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसे बाद में देहरादून ट्रांसफर किया गया था। लेकिन देहरादून पुलिस की जांच कमजोर साबित हुई।

अदालत में क्यों कमजोर पड़ा केस? सुनवाई के दौरान गवाहों और बयानों ने केस की दिशा बदल दी:

  1. पीड़िता का बयान: जिरह के दौरान छात्रा ने माना कि पार्टी में उसने और उसके साथियों ने शराब पी थी। नशे की हालत में उसे ठीक से याद नहीं था कि किसने और कब उसे टच किया।

  2. गवाहों के बयान: पार्टी में मौजूद अन्य विदेशी छात्रों ने गवाही दी कि आरोपी और पीड़िता अलग-अलग कमरों में सोए थे। एक छात्र ने बताया कि पीड़िता के चिल्लाने की आवाज आई थी, लेकिन जब वे कमरे में गए तो शायद वह बुरा सपना देख रही थी और आरोपी वहां मौजूद नहीं था।

इन विरोधाभासी बयानों और पुलिस की लचर विवेचना के कारण कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया।

 

 

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