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देहरादून: दुष्कर्मी बेटों से परेशान विधवा माता को न्याय, डीएम ने गुंडा एक्ट में दर्ज किया मामला

देहरादून : एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है जहां दो बिगड़ैल बेटों ने अपनी विधवा मां का जीवन नरक बना दिया था। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए पारंपरिक कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करके सीधे गुंडा एक्ट 1970 के तहत कार्यवाही शुरू की …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 25 अग, 2025
देहरादून: दुष्कर्मी बेटों से परेशान विधवा माता को न्याय, डीएम ने गुंडा एक्ट में दर्ज किया मामला

देहरादून : एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है जहां दो बिगड़ैल बेटों ने अपनी विधवा मां का जीवन नरक बना दिया था। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए पारंपरिक कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करके सीधे गुंडा एक्ट 1970 के तहत कार्यवाही शुरू की है। यह देहरादून जिले में पहली बार ऐसा मामला है जब थाना और अदालत की लंबी प्रक्रिया को छोड़कर डीएम ने अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग किया है।

22 अगस्त को जिलाधिकारी कार्यालय में विधवा महिला विजयलक्ष्मी पंवार, पत्नी स्वर्गीय मोहन सिंह पंवार, निवासी भागीरथपुरम, बंजारावाला ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उसके दोनों बेटे नशे के आदी हैं और नियमित रूप से उसे मारते-पीटते हैं। महिला ने बताया कि उसके बेटे अफीम, गांजा और शराब के नशे में धुत रहते हैं और पैसे की मांग करते रहते हैं। जब पैसे नहीं मिलते तो वे डंडों और हाथ-पैर से मारपीट करते हैं। अब तो उन्होंने जान से मारने की धमकी भी दे दी है।

विधवा महिला की शिकायत पर जिलाधिकारी ने उसी दिन गोपनीय जांच कराई। स्थानीय लोगों, पड़ोसियों और जनप्रतिनिधियों से जांच में पुष्टि हुई कि शुभम पंवार और उसके भाई वास्तव में अपनी माता के साथ मारपीट करते रहते हैं। गोपनीय इंक्वायरी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि “दोनों पुत्रों को प्रार्थिनी से दूर रखना आवश्यक प्रतीत होता है।”

जिलाधिकारी ने असहाय विधवा माता की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए दो घंटे के भीतर ही दोनों बेटों के विरुद्ध गुंडा अधिनियम के तहत कार्रवाही प्रारंभ कर दी। दोनों पुत्रों को नोटिस भेजकर 26 अगस्त को पूर्वाह्न 10:30 बजे डीएम कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया गया है। उन्हें स्पष्ट किया गया है कि यदि वे निर्धारित समय में कोई स्पष्टीकरण या उत्तर नहीं देते तो तदनुसार फास्ट ट्रैक प्रकरण निर्मित कर दिया जाएगा।

डीएम ने कहा कि जब स्वयं व्यथित माता ही गुहार लगा रही हो तो कानूनी जटिलताओं और नियमों की रार की क्या आवश्यकता है। मुख्यमंत्री के जनसेवा संकल्प से प्रेरित होकर जिला प्रशासन में भरण-पोषण से लेकर प्रताड़ना और शोषण के मामलों पर फास्ट ट्रैक सुनवाई और निर्णय हो रहे हैं। कलेक्ट्रेट अब न्याय का मंदिर बना है जहां आम जनता का विश्वास बहाल हो रहा है।

 

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