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Dehradun Municipal Corporation;का बड़ा फैसला स्लम एरिया से फिर वसूला जाएगा हाउस टैक्स, बड़े बकायेदारों पर भी शिकंजा.

देहरादून। चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 के अंतिम चरण में राजस्व बढ़ाने के लिए देहरादून नगर निगम(Dehradun Municipal Corporation) ने वसूली अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में नगर निगम ने राजधानी के स्लम एरिया से एक बार फिर हाउस टैक्स वसूलने का निर्णय लिया है। इसके तहत स्लम क्षेत्रों …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 04 फ़र, 2026
Dehradun Municipal Corporation;का बड़ा फैसला स्लम एरिया से फिर वसूला जाएगा हाउस टैक्स, बड़े बकायेदारों पर भी शिकंजा.

देहरादून। चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 के अंतिम चरण में राजस्व बढ़ाने के लिए देहरादून नगर निगम(Dehradun Municipal Corporation) ने वसूली अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में नगर निगम ने राजधानी के स्लम एरिया से एक बार फिर हाउस टैक्स वसूलने का निर्णय लिया है। इसके तहत स्लम क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष कर वसूली कैंप लगाए जाएंगे।

देहरादून नगर निगम का बड़ा फैसला: स्लम एरिया से फिर वसूला जाएगा हाउस टैक्स, बड़े बकायेदारों पर भी शिकंजा

नगर निगम(Dehradun Municipal Corporation) क्षेत्र में वर्तमान में 131 से अधिक स्लम एरिया चिन्हित हैं, जहां करीब दो लाख लोग निवास करते हैं। कुछ समय पहले इन क्षेत्रों से हाउस टैक्स की वसूली रोक दी गई थी, लेकिन अब निगम ने इसे दोबारा लागू करने का फैसला किया है। निगम अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से भवन कर से होने वाली आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

इसके साथ ही नगर निगम बड़े बकायेदारों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाने जा रहा है। निगम की ओर से ऐसे करदाताओं की सूची तैयार की जा रही है, जिन पर लंबे समय से भवन कर बकाया है। इन्हें कर भुगतान के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। वहीं, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी भवन कर के दायरे में लाकर अलग-अलग नोटिस भेजे जा रहे हैं।

नगर निगम(Dehradun Municipal Corporation) ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में भवन कर से 75 करोड़ रुपये राजस्व वसूली का लक्ष्य तय किया है। इसके सापेक्ष अब तक करीब 45 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। शेष लक्ष्य को हासिल करने के लिए फरवरी माह में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष कर वसूली कैंप लगाए जा रहे हैं।

नगर निगम का कहना है कि स्लम एरिया को कर दायरे में लाने और बकायेदारों पर सख्ती करने से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि कर व्यवस्था भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सकेगी।

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