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Dehradun:सावधान! एआई से डॉक्टरी सलाह पड़ रही भारी, दून अस्पताल में हर रोज पहुँच रहे 15 ‘रिएक्शन’ के मामले

देहरादून | मंगलवार, 17 फरवरी 2026 ​उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए खुद का इलाज करना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। दून अस्पताल के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एआई से पूछकर दवाएं लेने के कारण मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 17 फ़र, 2026
Dehradun:सावधान! एआई से डॉक्टरी सलाह पड़ रही भारी, दून अस्पताल में हर रोज पहुँच रहे 15 ‘रिएक्शन’ के मामले

देहरादून | मंगलवार, 17 फरवरी 2026

​उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए खुद का इलाज करना लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। दून अस्पताल के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एआई से पूछकर दवाएं लेने के कारण मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 15 मरीज दवाओं के रिएक्शन की शिकायत लेकर पहुँच रहे हैं।

Photo-social Media

गलत परामर्श से बढ़ रहा जोखिम

​दून अस्पताल के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरुण पांडेय के मुताबिक, बीते एक से डेढ़ साल में ऐसे मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। लोग बीमारी के लक्षण एआई टूल्स पर साझा कर दवाएं पूछ रहे हैं। डॉ. पांडेय ने बताया कि शरीर में दवाओं का रिएक्शन तब होता है जब बीमारी के प्रतिकूल दवा का सेवन किया जाए। कई बार दवाओं के नाम और स्पेलिंग में समानता होने के कारण एआई गलत दवा सुझा देता है, जिससे मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती है।

​मरीजों में दिख रहे ये गंभीर लक्षण

​एआई की सलाह पर गलत दवाएं लेने वाले मरीजों में निम्नलिखित लक्षण प्रमुखता से देखे जा रहे हैं:

​चेहरे और आंखों के आसपास गंभीर सूजन।

​पूरे शरीर में तेज खुजली और रैशेज।

​घबराहट और सांस लेने में तकलीफ।

​शरीर के आंतरिक अंगों (लिवर और किडनी) पर प्रतिकूल प्रभाव।

​जांच रिपोर्ट और सर्जरी को लेकर भी बढ़ा भ्रम

​रिपोर्ट के अनुसार, लोग लैब से जांच रिपोर्ट मिलते ही उसे समझने के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई बिना शारीरिक जांच, बीपी, शुगर और अन्य महत्वपूर्ण पैरामीटर्स को देखे बिना ही आंकड़ों के आधार पर संभावित बीमारियां बता देता है, जो अक्सर भ्रामक होती हैं।

​इसके अलावा, ऑपरेशन से पहले एआई के जरिए प्रक्रिया को आधा-अधूरा समझने के कारण मरीजों में डर बढ़ रहा है। कई मामलों में मरीज घबराहट के चलते पूरा इलाज करवाने से कतरा रहे हैं, जो उनकी स्थिति को और अधिक नाजुक बना रहा है।

​विशेषज्ञ की सलाह: “एआई कभी भी एक प्रशिक्षित डॉक्टर का स्थान नहीं ले सकता। बिना क्लिनिकल जांच के ली गई कोई भी दवा जानलेवा हो सकती है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए केवल योग्य चिकित्सक से ही परामर्श लें।”

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