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भक्त खाते है चूहों का झूठा प्रसाद – अनोखा सच

भक्त खाते है चूहों का झूठा प्रसाद : करणी माता, जिन्हें मां जगदंबा का अवतार माना जाता है, एक पूजनीय महिला संत थीं जिन्होंने 14वीं शताब्दी में अपना जीवन इसी क्षेत्र में बिताया था। वे अपनी दैवीय शक्तियों और चमत्कारी कार्यों के लिए प्रसिद्ध थीं। ऐसा माना जाता है कि …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 24 मई, 2025
भक्त खाते है चूहों का झूठा प्रसाद – अनोखा सच

भक्त खाते है चूहों का झूठा प्रसाद :  करणी माता, जिन्हें मां जगदंबा का अवतार माना जाता है, एक पूजनीय महिला संत थीं जिन्होंने 14वीं शताब्दी में अपना जीवन इसी क्षेत्र में बिताया था। वे अपनी दैवीय शक्तियों और चमत्कारी कार्यों के लिए प्रसिद्ध थीं। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने ही इस मंदिर की स्थापना की थी। स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि करणी माता के वंशज मृत्यु के बाद चूहों के रूप में पुनर्जन्म लेते हैं और मंदिर में निवास करते हैं।

चूहों का रहस्य

करणी माता मंदिर में हजारों काले और भूरे चूहे पाए जाते हैं जो मंदिर के प्रांगण में खुलेआम घूमते रहते हैं। इन चूहों को ‘काबा’ कहा जाता है और इन्हें करणी माता की संतान माना जाता है। मंदिर में इन चूहों को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाना घोर पाप माना जाता है। यहां तक ​​कि भक्तों को पैर घसीटकर चलने की सलाह दी जाती है ताकि अनजाने में भी किसी चूहे को चोट न लग जाए। मंदिर में कुछ सफेद चूहे भी दिखाई देते हैं, जिनके दर्शन बेहद शुभ माने जाते हैं। माना जाता है कि सफेद चूहे करणी माता और उनके बेटे का प्रतीक हैं।

चूहों का हल्का प्रसाद

करणी माता मंदिर की एक और अनोखी परंपरा है चूहों का बचा हुआ प्रसाद। मंदिर में देवी को चढ़ाया जाने वाला भोग सबसे पहले चूहों को खिलाया जाता है और फिर वही बचा हुआ प्रसाद भक्तों में बांट दिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि आज तक इस प्रसाद को खाने से किसी के बीमार होने की खबर नहीं आई है। भक्त इस प्रसाद को बड़ी श्रद्धा से ग्रहण करते हैं और इसे देवी का आशीर्वाद मानते हैं।

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