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दिवाकर भट्ट का निधन: उत्तराखंड की राजनीति को लगा बड़ा झटका, कल अंतिम संस्कार

देहरादून/हरिद्वार, 25 नवंबर 2025: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता, उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट का आज निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे। लंबे समय से बीमार चल रहे भट्ट ने हरिद्वार स्थित तरुण हिमालय आवास पर शाम …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 25 नव, 2025
दिवाकर भट्ट का निधन: उत्तराखंड की राजनीति को लगा बड़ा झटका, कल अंतिम संस्कार

देहरादून/हरिद्वार, 25 नवंबर 2025: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता, उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट का आज निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे। लंबे समय से बीमार चल रहे भट्ट ने हरिद्वार स्थित तरुण हिमालय आवास पर शाम लगभग 4:30 बजे अंतिम सांस ली

दिवाकर भट्ट कई दिनों से महंत इंदिरेश अस्पताल में उपचाराधीन थे। बुधवार दोपहर परिवार उन्हें अस्पताल से हरिद्वार स्थित घर ले आया, जहां कुछ ही समय बाद उनका निधन हो गया।

राज्य आंदोलन के प्रमुख योद्धा रहे

दिवाकर भट्ट 1979 में गठित उक्रांद के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे।

1968 की युवावस्था से ही वे उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़ गए थे।

हरिद्वार बीएचईएल में कर्मचारी नेता के रूप में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

वन अधिनियम विरोधी आंदोलन में सक्रिय रहते हुए वे लंबे समय तक जेल में भी रहे।

उन्होंने 1995 में श्रीनगर में श्रीयंत्र टापू आंदोलन का नेतृत्व किया।

वे टिहरी की खैट पर्वत और बाद में पौड़ी में आमरण अनशन पर बैठे। उनके खैट अनशन के बाद केंद्र सरकार ने वार्ता का न्योता दिया था।

राज्य आंदोलन के प्रमुख गांधीवादी नेता इंद्रमणि बडोनी ने उन्हें “उत्तराखंड का फील्ड मार्शल” की उपाधि दी थी।

राज्य गठन के बाद महत्वपूर्ण भूमिका

राज्य स्थापना के बाद 2007 में भाजपा–उक्रांद की पहली गठबंधन सरकार में दिवाकर भट्ट राजस्व और आपदा प्रबंधन सहित कई विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे।

खंडूरी सरकार में लागू सख्त भू-कानून बनाने में राजस्व मंत्री के रूप में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कल हरिद्वार में अंतिम संस्कार

परिजनों के अनुसार, दिवाकर भट्ट के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कल हरिद्वार में किया जाएगा।

उक्रांद के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी ने उनके निधन को स्तब्धकारी बताया और इसे उत्तराखंड तथा यूकेडी के लिए अपूरणीय क्षति कहा।

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