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उत्तराखण्ड सरकार की ऊर्जावान पहल से पिटकुल की 220/33 केवी उपसंस्थान, बरम एवं 220 केवी बरम-जौलजीबी पारेषण लाइन हुई ऊर्जीकृत

उत्तराखण्ड सरकार के युवा एवं यशस्वी मुख्यमंत्री, पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और प्रेरणा से प्रदेश की एक महत्त्वपूर्ण परियोजना को नई ऊँचाइयों पर ले जाया गया है। पिटकुल के 220/33 के0वी0 उपसंस्थान, बरम एवं 220 के0वी0 बरम-जौलजीबी पारेषण लाईन का सफलतापूर्वक ऊर्जीकरण किया गया। इस परियोजना में पावरग्रिड …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 02 अप्र, 2025
उत्तराखण्ड सरकार की ऊर्जावान पहल से पिटकुल की 220/33 केवी उपसंस्थान, बरम एवं 220 केवी बरम-जौलजीबी पारेषण लाइन हुई ऊर्जीकृत

उत्तराखण्ड सरकार के युवा एवं यशस्वी मुख्यमंत्री, पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और प्रेरणा से प्रदेश की एक महत्त्वपूर्ण परियोजना को नई ऊँचाइयों पर ले जाया गया है। पिटकुल के 220/33 के0वी0 उपसंस्थान, बरम एवं 220 के0वी0 बरम-जौलजीबी पारेषण लाईन का सफलतापूर्वक ऊर्जीकरण किया गया।

इस परियोजना में पावरग्रिड जौलजीबी छोर पर सभी अपेक्षित तकनीकी परीक्षणों को पूरा करने के पश्चात् विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई। परियोजना के कार्यों में तीव्रता एवं गति प्रदान करने हेतु मुख्यमंत्री एवं प्रमुख सचिव (ऊर्जा) डॉ आर0 मीनाक्षी सुन्दरम आई0ए0एस0 के मार्गदर्शन में प्रबन्ध निदेशक, पिटकुल पी0सी0 ध्यानी तथा निदेशक (परिचालन)  जी0एस0 बुदियाल ने विभिन्न राज्यों एवं ऊर्जा से जुड़ी इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस परियोजना के ऊर्जीकरण से प्रदेश के सम्मानित विद्युत उपभोक्ताओं को अनवरत और गुणवत्तायुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही, यह कदम भारत के मा0 प्रधानमंत्री द्वारा चलाए जा रहे वाईब्रैन्ट विलेज कार्यक्रमों में गति प्रदान करेगा, जिससे सीमाओं पर बुनियादी सुविधाओं के विकास की दिशा में नयी उम्मीदें जगेंगी। जनपद पिथौरागढ़ के सीमान्त तहसील धारचूला, मुनस्यारी एवं डीडीहाट में विद्युत आपूर्ति की मांग को पूरा करते हुए, भारतीय सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों (आई.टी.बी.पी., एस.एस.बी. एवं सी.आई.एस.एफ.) के अधिष्ठानों को भी गुणवत्तायुक्त बिजली मिल सकेगी। साथ ही, स्थानीय जनता को स्वरोजगार, उद्यमिता विकास एवं कुटीर उद्योगों के नये अवसर भी प्राप्त होंगे।

इस परियोजना के पूर्ण होने से पिटकुल क्षेत्र में निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित मध्यम एवं लघु जल विद्युत परियोजनाओं – जैसे मोतीघाट, टांगा, मदकिनी, ओकली-1, ओकली-2, बुर्थिंग, फुलीबगड, सिरकारी, भ्योल, रूपसियाबगड़, पैनागाड़, जिम्बागाड, तान्कुल, कन्च्यौती, छिरकिला, रेलागाड़, जिम्बा, मारम, रालम, भैंसिनी, उड्îार, रालम, सिम्पू एवं उड्îारफ्यूनशानी – के लिए ग्रिड तक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी। अनुमानित तौर पर यह परियोजना लगभग 432 मे0वा0 का विद्युत उत्पादन सुनिश्चित करेगी।

इस परियोजना के सफल ऊर्जीकरण से न केवल प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त बिजली प्राप्त होगी, बल्कि यह भारतीय सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों के अधिष्ठानों के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है। साथ ही, पिटकुल क्षेत्र में चल रहे विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रिपिंग की समस्या और लाईन लॉस में कमी लाने में भी मदद मिलेगी।

यह सफलता उत्तराखण्ड पॉवर कारपोरेशन लि0 के गुंजी, गंगोलीहाट, जौलजीवी, मुनस्यारी, धारचूला, नाचनी, तवाघाट सहित 33 के0वी0 फीडरों से विद्युत निकासी संभव करने के प्रयासों का परिणाम है। आगे चलकर राज्य, केन्द्र एवं निजी क्षेत्र की विभिन्न जल विद्युत परियोजनाओं के साथ, यह पहल प्रदेश के विकास एवं समग्र ऊर्जा आपूर्ति में क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आएगी।

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