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फर्जी जज बनकर चारधाम यात्रा में सरकारी रुतबा दिखाना पड़ा महंगा, दो आरोपियों को दो-दो साल की सजा; देवर हत्याकांड में नेपाली मजदूर को उम्रकैद

चारधाम यात्रा के दौरान खुद को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर सरकारी सुविधाओं का फायदा उठाने वाले दो लोगों को रुद्रप्रयाग की अदालत ने दोषी करार देते हुए दो-दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर जुर्माना भी लगाया है। यदि अर्थदंड जमा नहीं …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 17 जुल, 2026
फर्जी जज बनकर चारधाम यात्रा में सरकारी रुतबा दिखाना पड़ा महंगा, दो आरोपियों को दो-दो साल की सजा; देवर हत्याकांड में नेपाली मजदूर को उम्रकैद

चारधाम यात्रा के दौरान खुद को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर सरकारी सुविधाओं का फायदा उठाने वाले दो लोगों को रुद्रप्रयाग की अदालत ने दोषी करार देते हुए दो-दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर जुर्माना भी लगाया है। यदि अर्थदंड जमा नहीं किया जाता है तो उन्हें एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2024 में चारधाम यात्रा के दौरान गुप्तकाशी पुलिस को सूचना मिली थी कि एक सफेद कार में सवार कुछ लोग खुद को उत्तर प्रदेश का न्यायिक अधिकारी बताकर सरकारी रुतबा दिखा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने वाहन को रोका और जांच शुरू की।

पूछताछ में चालक ने अपना नाम अविनाश मोहन गुप्ता बताते हुए खुद को लखनऊ का सिविल जज बताया, जबकि साथ बैठी महिला ने अपना नाम ज्योति दुबे बताया। दोनों से पहचान पत्र मांगे गए तो प्रस्तुत दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। वाहन की तलाशी के दौरान उत्तर प्रदेश शासन के बोर्ड, फ्लैश लाइट, हूटर, तिरंगा झंडा और 17 मोबाइल फोन बरामद हुए।

जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी फर्जी न्यायिक अधिकारी बनकर सरकारी सुविधाओं और विशेषाधिकारों का अनुचित लाभ उठा रहे थे। इसके बाद गुप्तकाशी थाने में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया और विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।

ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 15 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। राज्य की ओर से सहायक लोक अभियोजक प्रमोद चंद्र आर्या ने प्रभावी पैरवी की।

सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिजीत कुमार की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने अविनाश मोहन गुप्ता और ज्योति दुबे को दोषी ठहराते हुए दो-दो वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा नहीं करने पर दोनों को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

यह फैसला सरकारी पद का फर्जी इस्तेमाल कर कानून को गुमराह करने और सरकारी सुविधाओं का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है।

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