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देहरादून IMA से निकलीं पहली 9 महिला अधिकारी, राष्ट्रपति बोलीं- बदलते भारत की तस्वीर

देहरादून: भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) देहरादून में शनिवार को आयोजित पासिंग आउट परेड (POP) के दौरान एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। अकादमी के इतिहास में पहली बार नौ महिला कैडेट्स प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में सैन्य अधिकारी के रूप में शामिल हुईं। राष्ट्रपति एवं भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 13 जून, 2026
देहरादून IMA से निकलीं पहली 9 महिला अधिकारी, राष्ट्रपति बोलीं- बदलते भारत की तस्वीर

देहरादून: भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) देहरादून में शनिवार को आयोजित पासिंग आउट परेड (POP) के दौरान एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। अकादमी के इतिहास में पहली बार नौ महिला कैडेट्स प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में सैन्य अधिकारी के रूप में शामिल हुईं। राष्ट्रपति एवं भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर Droupadi Murmu ने परेड की सलामी ली और नव नियुक्त अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं।

आईएमए के ऐतिहासिक चेटवुड ड्रिल स्क्वायर पर आयोजित समारोह में कुल 515 जेंटलमैन कैडेट्स और महिला कैडेट्स ने प्रशिक्षण पूरा कर सेना में कदम रखा। इनमें 481 भारतीय कैडेट्स के अलावा 16 मित्र देशों के 34 कैडेट्स भी शामिल रहे।

सुबह 6:40 बजे शुरू हुई भव्य परेड में कैडेट्स ने अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का शानदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने परेड का निरीक्षण किया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित किया। समारोह में Gurmit Singh, Pushkar Singh Dhami, सेना के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में परिजन मौजूद रहे।

परेड का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण वह रहा जब पहली बार आईएमए से प्रशिक्षित नौ महिला कैडेट्स ने अंतिम पग पार कर सैन्य अधिकारी के रूप में भारतीय सेना में प्रवेश किया। यह उपलब्धि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि आईएमए से पहली बार महिला अधिकारियों का पासआउट होना देश की बदलती तस्वीर और सशक्त भारत का प्रतीक है। उन्होंने नव नियुक्त अधिकारियों से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के साथ सेवा करने का आह्वान किया।

यह पासिंग आउट परेड केवल नए अधिकारियों के सैन्य जीवन की शुरुआत नहीं, बल्कि भारतीय सैन्य अकादमी और भारतीय सेना के इतिहास में महिलाओं की भागीदारी का एक नया अध्याय भी बन गई।

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