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वन विभाग का अधिकारी फिर चर्चा में, शासन ने जारी किया कारण बताओ नोटिस.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वन विभाग के एक अधिकारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला किसी विवादित वीडियो का नहीं, बल्कि शासकीय कार्यों में लापरवाही से जुड़ा है। शासन ने उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) राजीव नयन नौटियाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिससे विभाग …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 04 अप्र, 2026
वन विभाग का अधिकारी फिर चर्चा में, शासन ने जारी किया कारण बताओ नोटिस.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वन विभाग के एक अधिकारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला किसी विवादित वीडियो का नहीं, बल्कि शासकीय कार्यों में लापरवाही से जुड़ा है। शासन ने उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) राजीव नयन नौटियाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिससे विभाग में हलचल मच गई है।

वन विभाग का अधिकारी फिर चर्चा में, शासन ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

 

लापरवाही के आरोपों पर कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, विकासनगर और चकराता क्षेत्र में तैनात राजीव नयन नौटियाल पर अपने सरकारी दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन न करने के आरोप लगे हैं। शिकायतों में यह भी कहा गया है कि वह विभागीय बैठकों में शामिल नहीं हो रहे थे, यहां तक कि मंत्री स्तर की महत्वपूर्ण बैठकों से भी अनुपस्थित रहे। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए शासन ने उन्हें नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है।

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि तय समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनके खिलाफ आगे की विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

पहले भी विवादों में रह चुके हैं अधिकारी

राजीव नयन नौटियाल इससे पहले भी चर्चा में रह चुके हैं। कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उनके साथ बीच सड़क पर मारपीट होती नजर आई थी। इस घटना ने प्रदेश में सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भी बहस छेड़ दी थी।

बताया गया था कि नौटियाल ने अवैध खनन में शामिल एक वाहन की तस्वीर खींची थी, जिसके बाद कुछ लोगों से उनकी बहस हो गई और मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस घटना के बाद उन्होंने संबंधित लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया था।

अधिकारी ने क्या कहा

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए राजीव नयन नौटियाल ने स्वीकार किया कि उन्हें कारण बताओ नोटिस मिल चुका है। उन्होंने कहा कि उन्हें जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है और वह निर्धारित समय के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर देंगे।

फिलहाल, इस मामले में सबकी नजर उनके जवाब और शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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