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प्रदेश में चार जैव विविधता विरासत स्थल विकसित किए जाएंगे:

इनमें पिथौरागढ़ जिले के थलकेदार और दुगटू और उत्तरकाशी के कंदरा बुग्याल और खेड़ाताल शामिल हैं। इन्हें जैव विविधता विरासत स्थल घोषित करने की दृष्टि से उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड की कवायद अंतिम चरण में पहुंच गई है। जैव विविधता अधिनियम लागू: उत्तराखंड में जैव विविधता अधिनियम लागू है। इसमें …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 22 मई, 2023
प्रदेश में चार जैव विविधता विरासत स्थल विकसित किए जाएंगे:

इनमें पिथौरागढ़ जिले के थलकेदार और दुगटू और उत्तरकाशी के कंदरा बुग्याल और खेड़ाताल शामिल हैं।

इन्हें जैव विविधता विरासत स्थल घोषित करने की दृष्टि से उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड की कवायद अंतिम चरण में पहुंच गई है।

जैव विविधता अधिनियम लागू:

उत्तराखंड में जैव विविधता अधिनियम लागू है।

इसमें प्रावधान है कि सरकार स्थानीय निकायों की सहमति से जैव विविधता की दृष्टि से अद्वितीय स्थलों को जैव विविधता धरोहर स्थल घोषित कर सकती है।

इससे जहां ये अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर उभरेंगे, वहीं जैव विविधता के संरक्षण के प्रयासों को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से भी फंड उपलब्ध होगा।

हैरान करने वाली बात यह है कि अभी तक उत्तराखंड में ऐसी एक भी जगह घोषित नहीं की गई है।

हालांकि वर्षों पूर्व पिथौरागढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले थलकेदार को जैव विविधता विरासत स्थल घोषित करने की कवायद चल रही थी।

लेकिन यह हासिल नहीं हो सका. इसके बाद एक दर्जन जगह चिन्हित किया गया, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।

लंबे इंतजार के बाद अब उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड इसे लेकर गंभीर हो गया है।

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