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पहले राज्य की बेटियों का हक दिलवाओ, उसके बाद PCS मेंस की परीक्षा करवाओ

Get the rights of the daughters of the state first, then get the PCS Mains exam done. देहरादून :उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड महिलाओं को राज्य प्रशासनिक सेवाओं में दिए जा रहे 30% क्षैतिज आरक्षण पर रोक लगाई है। साथ ही साथ उत्तराखंड राज्य सेवा आयोग को निर्देश दिए हैं कि …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 29 सित, 2022
पहले राज्य की बेटियों का हक दिलवाओ, उसके बाद PCS मेंस की परीक्षा करवाओ

Get the rights of the daughters of the state first, then get the PCS Mains exam done.

देहरादून :उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड महिलाओं को राज्य प्रशासनिक सेवाओं में दिए जा रहे 30% क्षैतिज आरक्षण पर रोक लगाई है। साथ ही साथ उत्तराखंड राज्य सेवा आयोग को  निर्देश दिए हैं कि राज्य PCS परीक्षा में महिलाओं के लिए दोबारा कट ऑफ जारी करी जाए जिसमें बाहरी राज्यों की महिलाओं को भी 30% आरक्षण के कोटे में शामिल किया जाए।

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इस क्रमः में दिनांक 22 सितम्बर को हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में लोक सेवा आयोग ने बाहरी राज्यों की सभी महिलाओं को परीक्षा में शामिल करते हुए नया परीक्षा परिणाम जारी कर दिया, जिसमें बाहरी राज्यों की प्रत्येक महिला को मुख्य परीक्षा देने का मौका दे दिया गया है।

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लेकिन यह लोक सेवा आयोग का दोहरा रवैया है कि जहां एक ओर आयोग वन क्षेत्राधिकारी परीक्षा, असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा, ज्यूडिशियल सेवाओं की परीक्षाओं में आरक्षण के मुद्दे पर सरकार के जवाब का इंतजार कर रहा है वहीं दूसरी ओर आयोग आरक्षण के मुद्दे से सबसे ज्यादा प्रभावित “राज्य PCS  मुख्य परीक्षा” करवाने पर अड़ा हुआ है! आयोग की इस हठधर्मिता के कारण आज राज्य की बेटियों का भविष्य अधर में लटक चुका है।

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दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार पिछले दो महीने से स्थानीय महिलाओं के आरक्षण के संदर्भ में “अध्यादेश” लाने एवं सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर करने के वादे करते रही, इस बीच सरकार द्वारा प्राप्त निर्देशों के क्रम में आयोग ने बाहरी राज्य की लड़कियों को स्थानीय महिलाओं के लिए निर्धारित कोटे में शामिल कर दिया है।

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इस प्रकार स्थानीय महिलाओं के अधिकारो से हुए कुठाराघात से राज्य की प्रत्येक महिला अभ्यर्थी निराश है,एवं राज्य की आधी आबादी अपने हितों की रक्षा हेतु सरकार की ओर देख रही है।

आयोग द्वारा सरकार को महिला आरक्षण में प्रयास करने का मौका दिए बिना परीक्षा कराने से उन उत्तराखंड की महिलाओं के साथ भी अन्याय होगा जो अपने हकों के लिए सड़कों पर आंदोलन कर रही है और सरकारी प्रतिनिधियों से मिलकर हर यथासंभव प्रयास कर रही हैं।

राज्य की स्थानीय महिलाओं की एक ही मांग है कि राज्य सरकार वास्तविक रूप में राज्य की महिलाओं के लिए लड़ाई लड़े, एवं जब तक सरकार, स्थानीय महिलाओं हेतु 30% क्षैतिज आरक्षण सुनिश्चित नहीं कर लेती तब तक बाहरी महिलाओ को किसी भी स्थिति में मुख्य परीक्षा में सम्मिलित ना करे। इसके अतिरिक्त जब तक राज्य की बेटियों के पक्ष में सरकार 30% क्षैतिज आरक्षण सुनिश्चित नहीं कर लेती, तब तक मुख्य परीक्षा ना करवाई जाए।

राज्य निर्माण आंदोलन में प्रदेश की मातृशक्ति अग्रणी भूमिका को सरकार हमेशा याद रखना होगा यही शहीद आंदोलनकारी महिलाओं के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। चुनाव के समय आधी आबादी से किये वादे पूरे करने का राज्य की महिला अभ्यर्थियों को बेसब्री से इंतजार है।

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