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गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना: एक परिवार के तीन सदस्यों ने की आत्महत्या, गांव में पसरा मातम

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश : गोरखपुर जिले के हरपुर-बुदहट थाना क्षेत्र के कूचडेहरि गांव से एक दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां आपसी विवाद के चलते एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने एक-एक कर आत्महत्या कर ली। 18 वर्षीय बेटे की फांसी लगाने के बाद आहत …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 02 मई, 2025
गोरखपुर में दिल दहला देने वाली घटना: एक परिवार के तीन सदस्यों ने की आत्महत्या, गांव में पसरा मातम

गोरखपुर (उत्तर प्रदेश : गोरखपुर जिले के हरपुर-बुदहट थाना क्षेत्र के कूचडेहरि गांव से एक दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां आपसी विवाद के चलते एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने एक-एक कर आत्महत्या कर ली। 18 वर्षीय बेटे की फांसी लगाने के बाद आहत मां और 14 वर्षीय बेटी ने जहर खा लिया। बुधवार को बेटी की मौत हो गई, जबकि गुरुवार सुबह इलाज के दौरान मां ने भी दम तोड़ दिया। एक साथ तीन चिताओं की आग ने न सिर्फ एक परिवार को खत्म कर दिया बल्कि पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया।

1500 रुपये से शुरू हुआ विवाद, बेटे ने लगा ली फांसी

घटना की शुरुआत बुधवार सुबह हुई जब 18 वर्षीय मोहित कन्नौजिया ने अपनी मां कौशल्या देवी (46) से 1500 रुपये मांगे। पैसे न देने और डांटने पर आहत होकर मोहित ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बेटे को फंदे पर लटका देख मां कौशल्या और बेटी सुप्रिया (14) का मानसिक संतुलन डगमगा गया। दोनों ने जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की।

अस्पताल में चली जिंदगी की जंग, मां-बेटी की भी मौत

घटना की जानकारी मिलते ही दोनों को आनन-फानन में बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान बुधवार शाम को सुप्रिया ने दम तोड़ दिया, जबकि मां कौशल्या देवी की हालत नाजुक बनी रही। गुरुवार सुबह करीब 10 बजे उन्होंने भी अंतिम सांस ली। एक ही दिन में बेटे और बेटी को खोने वाली मां भी इस दुख को सहन नहीं कर पाईं और मौत को गले लगा लिया।

पोस्टमार्टम और एक साथ जलीं तीन चिताएं

मोहित, सुप्रिया और कौशल्या देवी के शवों का गुरुवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक साथ पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद तीनों शवों को गांव न ले जाकर राप्ती नदी के किनारे राजघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ जब तीनों चिताएं जलीं तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। सैकड़ों की भीड़ इस दुखद दृश्य की गवाह बनी।

बुजुर्ग हरिलाल पर टूटा दुखों का पहाड़

इस हादसे के बाद परिवार में केवल 72 वर्षीय दादा हरिलाल ही बचे हैं। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। हरिलाल ने बताया, “मेरे तीन बेटे थे। बड़े बेटे अंगद की 10 साल पहले मौत हो चुकी है। बाकी दो बेटे गंगासागर और रवि अपने-अपने परिवार के साथ अहमदाबाद में रहते हैं। कौशल्या और उसका परिवार मेरी सेवा करता था। अब सब मुझे छोड़कर चले गए।”

हरिलाल ने यह भी बताया कि पोता मोहित करीब 10 दिन पहले ही अहमदाबाद से वापस गांव आया था। उसकी दो बहनें रोली और बोली की शादी हो चुकी थी। छह महीने पहले मोहित ने खुद की कमाई से बोली की शादी करवाई थी। 22 मई को रिश्तेदारी में एक शादी तय थी, जिसकी तैयारी चल रही थी और घर में रिश्तेदारों का आना-जाना भी शुरू हो चुका था।

पुलिस ने की पुष्टि, मां-बेटी के शवों का विसरा सुरक्षित

एसपी उत्तरी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने पुष्टि की है कि परिवार के तीनों सदस्यों की मौत के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। हालांकि मां-बेटी के मौत की स्पष्ट वजह सामने नहीं आने के कारण उनका विसरा सुरक्षित कर लिया गया है ताकि जांच की जा सके।

अहमदाबाद में रहने वाले परिजन नहीं पहुंच सके

घटना के बाद भी अहमदाबाद में रहने वाले परिवार के अन्य सदस्य समय पर गोरखपुर नहीं पहुंच सके। अंतिम संस्कार में सिर्फ गांव के लोग और दादा हरिलाल मौजूद रहे। सभी ने मिलकर तीनों शवों को मुखाग्नि दी। इस हृदय विदारक घटना ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है।

कूचडेहरि गांव में हुई यह त्रासदी न केवल एक परिवार की बर्बादी है, बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर करती है कि मानसिक दबाव, आपसी रिश्तों में संवादहीनता और अवसाद किस तरह जिंदगियों को निगल रहा है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन हरिलाल जैसे बुजुर्ग के आंसू शायद कभी न थमें।

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