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Uttarkashi:धराली में मलबे के दस फीट नीचे दबे हैं होटल और लोग, GPR से मिले संकेत – खुदाई जारी

उत्तरकाशी: धराली गांव में 5 अगस्त को आई भयावह बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। एनडीआरएफ द्वारा इस्तेमाल किए गए अत्याधुनिक ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) की मदद से यह पता चला है कि बाढ़ के दौरान आए मलबे के 8 से 10 फीट …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 14 अग, 2025
Uttarkashi:धराली में मलबे के दस फीट नीचे दबे हैं होटल और लोग, GPR से मिले संकेत – खुदाई जारी

उत्तरकाशी:  धराली गांव में 5 अगस्त को आई भयावह बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। एनडीआरएफ द्वारा इस्तेमाल किए गए अत्याधुनिक ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) की मदद से यह पता चला है कि बाढ़ के दौरान आए मलबे के 8 से 10 फीट नीचे तक होटल और लोग दबे हुए हैं। इस जानकारी के बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें कई स्थानों पर निरंतर खुदाई का काम कर रही हैं।

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एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आरएस धपोला के अनुसार, जीपीआर तकनीक एक इलेक्ट्रिकल डिटेक्टर वेब का उपयोग करती है जो 40 मीटर की गहराई तक मलबे में दबे किसी भी तत्व की सटीक जानकारी प्रदान कर सकती है। इस उन्नत तकनीक से मिली तस्वीरों के आधार पर ही खोजबीन का काम तेज किया गया है। बुधवार को खुदाई के दौरान दो खच्चरों और एक गाय के शव मिले हैं, जो इस बात की पुष्टि करता है कि तकनीक सही दिशा दे रही है।

आपदा प्रभावित पूरे क्षेत्र को चार सेक्टरों में विभाजित कर व्यवस्थित तरीके से कार्य किया जा रहा है। दो सेक्टरों में एनडीआरएफ की टीमें काम कर रही हैं, जबकि बाकी दो सेक्टरों में एसडीआरएफ के जवान तैनात हैं। मौसम साफ होने पर बुधवार को सुबह 11 बजे से हेलिकॉप्टर सेवा भी शुरू हो गई, जिससे राहत कार्यों में तेजी आई है।

हालांकि, धराली में संचार सेवाएं अभी भी बाधित हैं, जिससे बाहरी दुनिया से संपर्क में कठिनाई हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए अब दो चिनूक और एक एमआई हेलिकॉप्टर को धरासू और चिन्यालीसौड़ में तैनात करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही एक एएलएच हेलिकॉप्टर भी पहुंच चुका है जो राहत कार्यों में सहायक होगा।

सरकार की ओर से आपदा के कारणों का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की टीमें भी मौके पर पहुंच गई हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना के जवान संयुक्त रूप से खोजबीन और रेस्क्यू अभियान चला रहे हैं। कई स्थानों पर मैन्युअल खुदाई का काम भी जारी है, जहां मशीनों का उपयोग संभव नहीं है।

यह आपदा उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं की भयावहता को दर्शाती है और दिखाती है कि कैसे आधुनिक तकनीक राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अधिकारी आशा कर रहे हैं कि जीपीआर तकनीक की मदद से जल्द ही और लोगों तक पहुंचा जा सकेगा।

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