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उत्तरकाशी में अमानवीय दृश्य: मोक्ष केदार घाट पर अधजले शवों को नोच रहे आवारा कुत्ते.

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। भागीरथी नदी के किनारे स्थित मोक्ष केदार घाट पर अधजले मानव शवों के अवशेषों को आवारा कुत्तों द्वारा नोचते हुए देखा जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश और भय का माहौल है। प्रत्यक्षदर्शियों …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 09 अप्र, 2026
उत्तरकाशी में अमानवीय दृश्य: मोक्ष केदार घाट पर अधजले शवों को नोच रहे आवारा कुत्ते.

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। भागीरथी नदी के किनारे स्थित मोक्ष केदार घाट पर अधजले मानव शवों के अवशेषों को आवारा कुत्तों द्वारा नोचते हुए देखा जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश और भय का माहौल है।

उत्तरकाशी में अमानवीय दृश्य: मोक्ष केदार घाट पर अधजले शवों को नोच रहे आवारा कुत्ते

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय संगठनों के अनुसार, घाट पर अंतिम संस्कार के बाद शवों के अवशेषों की समुचित सफाई नहीं की जा रही है। इसके चलते अधजले शवों के टुकड़े खुले में पड़े रह जाते हैं, जिन्हें लावारिस कुत्ते खा रहे हैं।

बढ़ता खतरा और लोगों में दहशत

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुत्तों के मुंह पर इंसानी मांस का स्वाद लगने के कारण उनका व्यवहार आक्रामक हो गया है। हाल के दिनों में कुत्तों के हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनमें कई लोग घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि बीते दिनों करीब 18 लोगों को कुत्तों ने काटकर घायल कर दिया।

गंगा विचार मंच से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति बेहद गंभीर है और प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। उनका आरोप है कि घाट पर साफ-सफाई और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में लापरवाही के कारण यह हालात पैदा हुए हैं।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मोक्ष केदार घाट पर नियमित सफाई अभियान चलाया जाए और आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अंतिम संस्कार के बाद शवों के अवशेष पूरी तरह से नष्ट किए जाएं।

गौरतलब है कि इस तरह की स्थिति पहले भी कोविड काल के दौरान सामने आई थी, लेकिन अब सामान्य परिस्थितियों में भी ऐसे दृश्य सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

फिलहाल, यह मामला न केवल मानवता को झकझोरने वाला है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता पैदा कर रहा है।

 

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