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रायपुर तिराह पहुँचे महाराज, पं. महावीर शर्मा को दी श्रद्धांजलि

Report/- Bhagwan Singh :- देहरादून /रामपुर। मुजफ्फरनगर, रामपुर में उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों के साथ 02 अक्टूबर, 1994 में हुई पुलिस बर्बरता एवं अत्याचार के खिलाफ उत्तराखण्ड सरकार की ओर से मुख्य पक्षकार और शहीद स्मारक को भूमि दान देने वाले पं. महावीर शर्मा के असमायिक निधन के पश्चात त्रयोदशी संस्कार …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 07 अग, 2022
रायपुर तिराह पहुँचे महाराज, पं. महावीर शर्मा को दी श्रद्धांजलि

Report/- Bhagwan Singh :- देहरादून /रामपुर। मुजफ्फरनगर, रामपुर में उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों के साथ 02 अक्टूबर, 1994 में हुई पुलिस बर्बरता एवं अत्याचार के खिलाफ उत्तराखण्ड सरकार की ओर से मुख्य पक्षकार और शहीद स्मारक को भूमि दान देने वाले पं. महावीर शर्मा के असमायिक निधन के पश्चात त्रयोदशी संस्कार में पहुँचे प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने राज्य सरकार की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रदेश के संस्कृति, धर्मस्व, पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायती राज, ग्रामीण निर्माण एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रतिनिधि के तौर पर रविवार को उत्तर प्रदेश, मुजफ्फरनगर स्थित

रायपुर तिराह पहुँच कर उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों की स्मृति में रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में शहीद स्मारक के निर्माण के लिए भूमि दानदाता स्वर्गीय पंडित महावीर शर्मा के असामयिक निधन के पश्चात त्रयोदशी संस्कार में पहुँच कर राज्य सरकार और उत्तराखंड की जनता की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

त्रयोदशी संस्कार के दौरान शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना देते हुए कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि स्व. पंडित महावीर शर्मा हमेशा से उत्तराखंड के पक्षधर रहे और वह रामपुर, मुजफ्फरनगर में उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों के साथ 02 अक्टूबर, 1994 में हुई पुलिस बर्बरता एवं अत्याचार के खिलाफ उत्तराखण्ड सरकार की ओर से मुख्य पक्षकार भी रहे हैं।

श्री महाराज ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य प्राप्ति के लिये शान्ति पूर्ण तरीके से अपनी माँग को केन्द्र सरकार के समक्ष रखने के लिये दिल्ली जा रहे आन्दोलनकारियों के साथ रामपुर तिराहे में भारी रक्तपात हुआ था ।

उस दौरान आन्दोलनकारियों को सर्वप्रथम मदद पहुँचाने एवं संरक्षण देने में पं. महावीर शर्मा का अहम योगदान रहा है। त्रयोदशी संस्कार के समय पुत्र निर्दोष शर्मा, अनिरूद्ध शर्मा और पोता शुभम शर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित थे

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