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नई दिल्ली:मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों वाले फैसले को बताया अव्यावहारिक

नई दिल्ली: भाजपा नेता और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया फैसले की तीखी आलोचना की है जिसमें दिल्ली-एनसीआर की गलियों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने सोमवार को इस आदेश को ‘अव्यावहारिक’, ‘आर्थिक रूप …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 11 अग, 2025
नई दिल्ली:मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों वाले फैसले को बताया अव्यावहारिक

नई दिल्ली: भाजपा नेता और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया फैसले की तीखी आलोचना की है जिसमें दिल्ली-एनसीआर की गलियों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने सोमवार को इस आदेश को ‘अव्यावहारिक’, ‘आर्थिक रूप से असंभव’ और ‘पर्यावरण संतुलन के लिए खतरनाक’ बताते हुए कहा कि इससे नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को ‘गंभीर समस्या’ करार देते हुए दिल्ली सरकार और नगर निकायों को निर्देश दिया है कि वे सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को उठाकर आश्रय गृहों में रखें। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि इस अभियान में बाधा डालने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, मेनका गांधी और कई पशु अधिकार संगठनों का मानना है कि यह फैसला व्यावहारिक रूप से लागू कना असंभव है।

मेनका गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि दिल्ली में लगभग तीन लाख कुत्ते हैं और अगर इन सभी को सड़कों से हटाना है तो लगभग तीन हजार आश्रय गृह बनाने होंगे। उन्होंने बताया कि इन आश्रय गृहों में नाली, पानी, छत, रसोई और चौकीदार की व्यवस्था करनी होगी, जिसकी कुल लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दिल्ली सरकार के पास इतनी भारी मात्रा में धन उपलब्ध है।

आर्थिक पहलू पर और प्रकाश डालते हुए मेनका गांधी ने कहा कि इन तीन लाख कुत्तों को रोजाना भोजन उपलब्ध कराने पर सप्ताह में पांच करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इतना भारी खर्च जनता में आक्रोश का कारण बन सकता है। पशु अधिकार कार्यकर्ता का यह भी कहना है कि कुत्तों को उनके प्राकृतिक वातावरण से हटाना पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बिगाड़ सकता है, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है। यह विवाद दिल्ली में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और उनके प्रबंधन के तरीकों पर एक व्यापक बहस को जन्म दे रहा है।

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