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एनडीए ने सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया, रक्षा मंत्री ने कांग्रेस से मांगा समर्थन

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए महाराष्ट्र के वर्तमान राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने रविवार को नई दिल्ली में पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद इस महत्वपूर्ण घोषणा …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 18 अग, 2025
एनडीए ने सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया, रक्षा मंत्री ने कांग्रेस से मांगा समर्थन

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए महाराष्ट्र के वर्तमान राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने रविवार को नई दिल्ली में पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद इस महत्वपूर्ण घोषणा की। इस चुनाव की देखरेख रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे, जबकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को चुनाव एजेंट नियुक्त किया गया है।

निर्विरोध चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार शाम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और राधाकृष्णन के लिए कांग्रेस का समर्थन मांगा। भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने स्पष्ट किया कि पार्टी सभी विपक्षी दलों से संपर्क करेगी ताकि सर्वसम्मति से उपराष्ट्रपति का चुनाव हो सके। उन्होंने कहा, “हम विपक्ष से भी बात करेंगे। हमें उनका समर्थन भी प्राप्त करना चाहिए ताकि हम मिलकर उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्विरोध चुनाव सुनिश्चित कर सकें।”

सी.पी. राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर अत्यंत प्रेरणादायक है। वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में सेवारत राधाकृष्णन ने अपनी राजनीतिक यात्रा मात्र 16 वर्ष की आयु में 1974 में जनसंघ के माध्यम से शुरू की थी। उन्होंने कोयंबटूर संसदीय क्षेत्र से दो बार लोकसभा सदस्य के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व किया है। 1998 में उन्होंने अपना पहला चुनाव 1,50,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से जीता था और 1999 में पुनः उसी क्षेत्र से विजयी हुए।

राधाकृष्णन का राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ और वे आरएसएस जैसे संगठनों से भी जुड़े रहे। 1996 में वे तमिलनाडु भाजपा के सचिव बने और बाद में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। चार दशकों से अधिक के अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सुधार और जन कल्याण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने ऐसे आंदोलनों का नेतृत्व किया है जो महत्वपूर्ण सामाजिक और विकासात्मक चुनौतियों का समाधान करते हैं।

एनडीए का यह कदम राजनीतिक एकजुटता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जहाँ गठबंधन निर्विरोध चुनाव के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाने का प्रयास कर रहा है।

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