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बटोली गांव की वर्षों पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान: डीएम सविन बंसल ने जारी की पेयजल व विद्युत परियोजना हेतु स्वीकृति राशि

देहरादून : आपदाग्रस्त क्षेत्र बटोली की वर्षों पुरानी लो वोल्टेज और पेयजल संकट की समस्या का अब स्थायी समाधान कर दिया गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा क्षेत्र के दौरे के बाद शीघ्र कार्रवाई करते हुए विद्युत व जल आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाओं हेतु आवश्यक बजट जारी कर दिया गया …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 22 जुल, 2025
बटोली गांव की वर्षों पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान: डीएम सविन बंसल ने जारी की पेयजल व विद्युत परियोजना हेतु स्वीकृति राशि

देहरादून : आपदाग्रस्त क्षेत्र बटोली की वर्षों पुरानी लो वोल्टेज और पेयजल संकट की समस्या का अब स्थायी समाधान कर दिया गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा क्षेत्र के दौरे के बाद शीघ्र कार्रवाई करते हुए विद्युत व जल आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाओं हेतु आवश्यक बजट जारी कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में डीएम ने एक सप्ताह के भीतर अपनी प्रतिबद्धता को निभाते हुए पेयजल योजना के लिए 3.79 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। यह धनराशि पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण शाखा को अवमुक्त की गई है। इसके साथ ही जंगल के बीच से गुजर रही बाधित विद्युत लाइन को दुरुस्त करने हेतु भी धनराशि जारी की गई है और युद्धस्तर पर कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं।

सहसपुर ब्लॉक की मिसराज पट्टी के सुदूरवर्ती गांव बटोली में सड़क संपर्क टूटने के बाद डीएम ने स्वयं प्रभावितों से मिलकर स्थिति का जायजा लिया और हर परिवार को ₹4,000 प्रतिमाह की दर से तीन माह की अग्रिम राहत राशि मौके पर ही प्रदान की।

साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में शिविर लगाया गया और शेरू खाला मार्ग को रातों-रात सुचारू किया गया। भविष्य की आपदा स्थितियों को देखते हुए अस्थायी हेलीपैड निर्माण की दिशा में भी भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने बताया कि योजना की पत्रावली 21 जुलाई को जिलाधिकारी को प्रस्तुत की गई थी, जिस पर स्वीकृति मिलने के बाद 3.79 लाख की राशि तुरंत कार्यदायी संस्था को अवमुक्त कर दी गई। कार्य पूर्ण होने के उपरांत संस्था को जीओ टैग फोटोग्राफ सहित उपयोगिता प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा।

जिलाधिकारी सविन बंसल के इस त्वरित निर्णय और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण ने आपदा प्रभावित क्षेत्रवासियों को एक नई आशा दी है।

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