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हाईटेंशन लाइन के नीचे अवैध निर्माण पर पिटकुल सख्त

देहरादून | 20 दिसंबर 2025: चंद्रबनी, देहरादून में 19 दिसंबर 2025 को हाईटेंशन लाइन के नीचे अवैध निर्माण के कारण हुई दुर्घटना के दृष्टिगत पिटकुल के प्रबन्ध निदेशक पी.सी. ध्यानी द्वारा गढ़वाल एवं कुमाऊँ क्षेत्र के अधिकारियों की समीक्षा बैठक की गई। बैठक में सहायक अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 21 दिस्, 2025
हाईटेंशन लाइन के नीचे अवैध निर्माण पर पिटकुल सख्त

देहरादून | 20 दिसंबर 2025: चंद्रबनी, देहरादून में 19 दिसंबर 2025 को हाईटेंशन लाइन के नीचे अवैध निर्माण के कारण हुई दुर्घटना के दृष्टिगत पिटकुल के प्रबन्ध निदेशक पी.सी. ध्यानी द्वारा गढ़वाल एवं कुमाऊँ क्षेत्र के अधिकारियों की समीक्षा बैठक की गई।

बैठक में सहायक अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता स्तर तक के अधिकारी उपस्थित रहे। प्रबन्ध निदेशक ने निर्देश दिए कि सभी अवर अभियंता, सहायक अभियंता एवं अधिशासी अभियंता अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर पिटकुल की हाईटेंशन लाइनों एवं टावरों के नीचे हो रहे अवैध निर्माणों को चिन्हित करें।

उन्होंने निर्देशित किया कि ऐसे अवैध निर्माणों के विरुद्ध संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी किए जाएं तथा इसकी सूचना नगर निगम, नगर पालिका, विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) एवं संबंधित जिलाधिकारियों को भी दी जाए। साथ ही, इन सूचनाओं का प्रकाशन समाचार पत्रों में कराया जाए। सभी मामलों की साप्ताहिक रिपोर्ट तैयार कर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने तथा मौके पर जाकर लोगों को जागरूक एवं आगाह करने के निर्देश भी दिए गए।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 18 अक्टूबर 2025 (धनतेरस) को भी इसी प्रकार की दुर्घटना घटित हुई थी, जिसके बाद देहरादून क्षेत्र में हाईटेंशन लाइनों एवं टावरों के नीचे अवैध निर्माण को चिन्हित कर लगभग 250 लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि हाईटेंशन लाइनों के नीचे निर्माण कार्य जानलेवा हो सकता है।

पिटकुल प्रबंधन द्वारा पूर्व में भी 6 अगस्त 2025 एवं 18 अक्टूबर 2025 को समाचार पत्रों के माध्यम से आमजन से अपील की गई थी कि 400/220/132 केवी की विद्युत लाइनें उच्च विभव की होती हैं। इनके नीचे किसी भी प्रकार का अनाधिकृत निर्माण न किया जाए, क्योंकि इससे गंभीर एवं घातक दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

पिटकुल ने स्पष्ट किया है कि विद्युत लाइनों के नीचे निर्माण कार्य केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण विनियम-2010 एवं भारतीय विद्युत अधिनियम-1956 (संशोधित 2003) के नियमों के विरुद्ध है।

 

 

 

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