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चारधाम यात्रा से पहले गैस आपूर्ति पर सियासत तेज, गणेश गोदियाल ने सरकार को घेरा.

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा से पहले गैस आपूर्ति को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए गैस आपूर्ति में कोताही को पर्यटन के लिए घातक बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से गैस …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 07 अप्र, 2026
चारधाम यात्रा से पहले गैस आपूर्ति पर सियासत तेज, गणेश गोदियाल ने सरकार को घेरा.

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा से पहले गैस आपूर्ति को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए गैस आपूर्ति में कोताही को पर्यटन के लिए घातक बताया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से गैस की किल्लत और कालाबाजारी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। यदि वास्तव में राज्य में गैस की कमी नहीं है, तो सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। गोदियाल ने कहा कि 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा को देखते हुए यह सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है कि यात्रा मार्गों पर स्थित होटल, ढाबों और व्यवसायियों को गैस की निर्बाध आपूर्ति मिले।

चारधाम यात्रा से पहले गैस आपूर्ति पर सियासत तेज, गणेश गोदियाल ने सरकार को घेरा

उन्होंने अपने हरिद्वार दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि कई होटल व्यवसायियों ने उन्हें जानकारी दी कि गैस संकट और अनिश्चितता के चलते उनकी बुकिंग्स रद्द हो रही हैं। लोगों में यह आशंका बनी हुई है कि आने वाले दिनों में स्थिति कैसी रहेगी।

गोदियाल ने कहा कि राज्य सरकार का इस मुद्दे पर चुप रहना उचित नहीं है। सरकार को आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, साथ ही केंद्र सरकार को भी यह भरोसा देना चाहिए कि चारधाम यात्रा और गर्मी के पर्यटन सीजन के दौरान गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने जोर देकर कहा कि चारधाम यात्रा केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि इससे हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। यदि होटल और पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को समय पर गैस नहीं मिलती है, तो इसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर पड़ेगा।

गौरतलब है कि प्रदेश में इन दिनों एलपीजी की कमी देखी जा रही है। कई स्थानों पर होटल और ढाबा संचालक लकड़ी और कोयले का सहारा लेकर खाना बनाने को मजबूर हैं, जिससे उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

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