
सजा के साथ जिम्मेदारी का अहसास सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) के निर्देशन में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य केवल राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि लोगों की सोच बदलना है। अभियान के शुरुआती तीन दिनों में टीम ने चालकों को केवल फूल देकर समझाया था, लेकिन आज सख्ती बरती गई।

आईआईपी (IIP) और सहस्त्रधारा रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर चले इस अभियान के दौरान अधिकारियों ने चालकों को रोका और चालान की कार्रवाई की। इसके बाद उन्हें गेंदे का पौधा देते हुए समझाया गया कि “जिस तरह एक पौधे को खिलने के लिए निरंतर देखभाल और सुरक्षा की जरूरत होती है, उसी तरह सड़क पर आपका जीवन भी नियमों के पालन और सावधानी पर निर्भर है।”
क्या बोले अधिकारी? इस मौके पर एआरटीओ (ARTO) श्री पंकज श्रीवास्तव ने चालकों को जागरूक करते हुए कहा, “सीट बेल्ट को महज एक कानूनी नियम न समझें, यह दुर्घटना के समय आपका जीवन रक्षक कवच है। सड़क सुरक्षा तभी संभव है जब हर नागरिक इसे अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी माने।”
वहीं, आरटीओ डॉ. अनीता चमोला ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि उनकी जान बचाना है। उन्होंने कहा, “प्रवर्तन के साथ जागरूकता ही बदलाव ला सकती है। हम चाहते हैं कि लोग खुद अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत हों।”
पूरी टीम रही मुस्तैद इस अभियान को सफल बनाने में परिवहन कर अधिकारी एम.डी. पपनोई, श्वेता रौथान, अनुराधा पंत के साथ-साथ टीएसआई अरविंद सिंह, कुशल और उनकी पूरी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रवर्तन दल के सिपाही और चालक भी सड़क सुरक्षा का संदेश जन-जन तक पहुंचाने में जुटे रहे।
जनता से अपील परिवहन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे हेलमेट, सीट बेल्ट और गति सीमा का पालन करें। गाड़ी चलाते समय मोबाइल का उपयोग न करें, क्योंकि सड़क सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है।