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13 साल के बच्चे की आत्महत्या ने उठाए सवाल – ‘मां, मैंने चोरी नहीं की’ कहकर तोड़ा दम”

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पंसकुरा से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 13 साल के एक मासूम बच्चे ने आत्महत्या कर ली, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसे चिप्स चोरी के आरोप में सार्वजनिक रूप से डांटा गया था – पहले दुकानदार …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 23 मई, 2025
13 साल के बच्चे की आत्महत्या ने उठाए सवाल – ‘मां, मैंने चोरी नहीं की’ कहकर तोड़ा दम”

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पंसकुरा से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 13 साल के एक मासूम बच्चे ने आत्महत्या कर ली, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसे चिप्स चोरी के आरोप में सार्वजनिक रूप से डांटा गया था – पहले दुकानदार ने, फिर उसकी अपनी मां ने।

कक्षा 7 में पढ़ने वाला कृष्णेंदु दास, “बकुलदा हाई स्कूल” का छात्र था। रविवार को उस पर आरोप लगा कि उसने गोसाईंबेर बाजार में स्थित एक मिठाई की दुकान से चुपचाप तीन चिप्स के पैकेट चुरा लिए। दुकान शुभांकर दीक्षित नामक एक सिविल वॉलंटियर की थी। बताया जा रहा है कि दुकान मालिक की गैरमौजूदगी में कृष्णेंदु ने चिप्स उठाए, लेकिन बाद में जब दुकानदार ने उसे पकड़ लिया तो बच्चे ने खुद ही तीनों पैकेट के बदले 20 रुपये दे दिए।

पैसे देने के बावजूद नहीं छोड़ा गया

लेकिन बात यहीं नहीं रुकी। दुकानदार ने न केवल उसे पैसे लौटाने के बहाने फिर से दुकान पर बुलाया, बल्कि वहां बच्चे के साथ मारपीट की और सबके सामने उससे माफी भी मंगवाई। इस अपमान से बच्चा पहले ही टूटा हुआ था, और तभी उसकी मां को घटना की जानकारी मिली। मां भी बेटे को लेकर उसी दुकान पर पहुंचीं और भीड़ के सामने उसे डांट दिया।

“मां, मैंने चोरी नहीं की..” – आखिरी शब्द

अपमान और मानसिक आघात से आहत कृष्णेंदु ने घर लौटते ही आत्महत्या करने की कोशिश की। उसे गंभीर हालत में तामलुक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां गुरुवार को उसकी मौत हो गई। बच्चे ने एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उसने लिखा – “मां, मैंने चोरी नहीं की।”

इस एक पंक्ति ने पूरे मामले को भीतर तक झकझोर दिया है। यह सिर्फ एक मासूम की मौत नहीं, बल्कि एक चेतावनी है – उन सभी के लिए जो बच्चों की भावनाओं को हल्के में ले लेते हैं।

मां-बाप और समाज को सीख लेने की जरूरत

कृष्णेंदु की मौत ने इस बात को उजागर कर दिया है कि बच्चों के मन पर छोटी-छोटी बातों का कितना गहरा असर पड़ता है। डांटना और अनुशासन सिखाना ज़रूरी है, लेकिन सार्वजनिक अपमान बच्चों की आत्मा को तोड़ देता है। वे इसे अपनी बेइज्जती मानते हैं और कई बार इससे उबर नहीं पाते।

परिवार का साफ आरोप है कि मिठाई दुकानदार की बर्बरता और मां की सार्वजनिक डांट ने मिलकर बच्चे को यह खौफनाक कदम उठाने को मजबूर किया। वहीं आरोपी दुकानदार फिलहाल फरार है, और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

क्या हमें बच्चों को समझना नहीं चाहिए?

यह घटना हर उस अभिभावक और शिक्षक के लिए चेतावनी है, जो बच्चों की गलतियों पर उन्हें सबसे सामने अपमानित करते हैं। बच्चों की उम्र का मन बेहद नाजुक होता है। उन्हें सही-गलत समझाने की ज़रूरत होती है, न कि अपमानित करने की।

अगर कोई गलती हो भी जाए, तो बच्चों से अकेले में बात करें, उन्हें समझाएं, प्यार से सुधारें। क्योंकि डांटकर, मारकर और बेइज्जती करके हम सिर्फ उनकी भावनाओं को कुचलते हैं – कभी-कभी इतनी गहराई तक कि वह उन्हें मौत के दरवाज़े तक पहुंचा देती हैं। अब वक्त है, जब माता-पिता और समाज को मिलकर अपने व्यवहार पर सोचने की जरूरत है – इससे पहले कि और कोई कृष्णेंदु इस दुनिया को अलविदा कहे।

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