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देश का पहला शून्‍य मंदिर

देश का पहला शून्‍य मंदिर : वाराणसी को दुनिया का सबसे प्राचीन शहर कहा जाता है. भोले नाथ की नगरी काशी में वैसे तो कई प्राचीन मंदिर हैं. ज्यादातर मंदिरों का कायाकल्‍प भी हो चुका है. काशी में ही एक दरवाजों का मंदिर है, जो करीब 210 साल पुराना है. …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 04 जून, 2025
देश का पहला शून्‍य मंदिर

देश का पहला शून्‍य मंदिर : वाराणसी को दुनिया का सबसे प्राचीन शहर कहा जाता है. भोले नाथ की नगरी काशी में वैसे तो कई प्राचीन मंदिर हैं. ज्यादातर मंदिरों का कायाकल्‍प भी हो चुका है. काशी में ही एक दरवाजों का मंदिर है, जो करीब 210 साल पुराना है. इसे यूपी के दरवाजों वाले मंदिर भी कहा जाता है. वाराणसी के भेलूपुर में गुरुधाम मंदिर बना है. इस मंदिर का निर्माण राजा जयनारायण घोषाल ने अपने गुरु के लिए साल 1814 में कराया था. मिश्रित शैली में निर्मित यह मंदिर योग और तंत्र विद्या पर आधारित है. खास बात यह है कि इस मंदिर में 8 प्रवेश द्वार हैं. इतना ही नहीं इस मंदिर के सात द्वार सप्तपुरियों अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, उज्‍जैन और पुरी के प्रतीक हैं. आठवां द्वार गुरु का द्वार है।

जानकारों का कहना है कि गुरुधाम मंदिर का प्रवेश द्वार काशी द्वार है. इसके बाद गुरु मंदिर स्थित है. मंदिर के भूतल से जाने के लिए सीढ़ी बनी है. मंदिर के पहले तल पर गर्भगृह बना है. पहले तल के ऊपर एक और फ्लोर है. दूसरे तल पर राधा-कृष्ण और तीसरे तल पर व्योम यानी शून्य का प्रतीक मंदिर है. कहा जाता है कि द्वितीय तल योग-साधना की चरम अवस्था का प्रतीक है. मंदिर के पहले तल पर गुरु वशिष्ठ और अरुंधति की मूर्ति स्थापित थी।

जानकारों का कहना है कि गुरुधाम मंदिर का प्रवेश द्वार काशी द्वार है. इसके बाद गुरु मंदिर स्थित है. मंदिर के भूतल से जाने के लिए सीढ़ी बनी है. मंदिर के पहले तल पर गर्भगृह बना है. पहले तल के ऊपर एक और फ्लोर है. दूसरे तल पर राधा-कृष्ण और तीसरे तल पर व्योम यानी शून्य का प्रतीक मंदिर है. कहा जाता है कि द्वितीय तल योग-साधना की चरम अवस्था का प्रतीक है. मंदिर के पहले तल पर गुरु वशिष्ठ और अरुंधति की मूर्ति स्थापित थी।

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