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उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की हकीकत: ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हजारों बच्चे,

देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षा विभाग एक ओर सरकारी स्कूलों को आधुनिक और हाईटेक बनाने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में आज भी बच्चों को पढ़ाई के लिए बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 28 जन, 2026
उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की हकीकत: ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हजारों बच्चे,

देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षा विभाग एक ओर सरकारी स्कूलों को आधुनिक और हाईटेक बनाने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में आज भी बच्चों को पढ़ाई के लिए बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हैं। ठिठुरन भरे मौसम में हजारों बच्चे बिना कुर्सी और मेज के जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 6864 छात्र ऐसे हैं, जो स्कूलों में फर्नीचर के अभाव में जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। फर्नीचर की कमी के साथ-साथ कई स्कूलों में पर्याप्त कमरे, हीटर, पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है।

शिक्षा विभाग की ओर से दावा किया जा रहा है कि सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार प्रदेश के 840 से अधिक स्कूलों में हाइब्रिड मोड पर स्मार्ट क्लास और वर्चुअल क्लासरूम की शुरुआत की गई है। इन कक्षाओं में एनसीईआरटी और एससीईआरटी का डिजिटल कंटेंट, एलईडी स्क्रीन और इंटरनेट सुविधा के माध्यम से पढ़ाई को रोचक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके अलावा चार हजार से अधिक स्कूलों में ‘संपर्क स्मार्ट शाला’ कार्यक्रम के तहत स्मार्ट टीवी और डिजिटल शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है। हालांकि, जमीनी स्तर पर हालात यह हैं कि कई स्कूलों में डिजिटल संसाधनों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे की भी भारी कमी है।

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