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सदाबहार जवान द्रौपदी के अनसुने रहस्य !

सदाबहार जवान द्रौपदी के अनसुने रहस्य ! : महाभारत में अगर किसी सुंदरी की सुंदरता की सबसे ज्यादा तारीफ की गई तो वो द्रौपदी थीं. जिन्हें ताउम्र अप्रतिम सुंदर और सदाबहार जवान रहने के लिए एक खास वरदान मिला हुआ था. इसी तरह जब वह पैदा हुईं तो एक भविष्यवाणी …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 14 मई, 2025
सदाबहार जवान द्रौपदी के अनसुने रहस्य !

सदाबहार जवान द्रौपदी के अनसुने रहस्य ! : महाभारत में अगर किसी सुंदरी की सुंदरता की सबसे ज्यादा तारीफ की गई तो वो द्रौपदी थीं. जिन्हें ताउम्र अप्रतिम सुंदर और सदाबहार जवान रहने के लिए एक खास वरदान मिला हुआ था. इसी तरह जब वह पैदा हुईं तो एक भविष्यवाणी भी हुई. द्रौपदी को हमेशा महाभारत की अनिंद्य सुंदरी माना गया. महाभारत काल में कई स्त्रियों की सुंदरता की तारीफ की जाती है लेकिन जब बात द्रौपदी की आती है तो राय एक जैसी हो जाती है कि द्रौपदी जैसी अप्रतिम सुंदरी कोई नहीं थी. जिसमें एक दिव्य ओज था. जब द्रौपदी का जन्म हुआ, तो एक आकाशवाणी हुई कि “यह कन्या समस्त स्त्रियों में श्रेष्ठ होगी. तमाम क्षत्रियों के विनाश का कारण बनेगी”.

क्या हुई थी जन्म के समय भविष्यवाणी

जैसे ही द्रौपदी यज्ञ कुंड से प्रकट हुईं, यह घोषणा हुई कि उनका जन्म विशेष रूप से क्षत्रिय वंशों के विनाश और महाभारत के युद्ध के कारण के तौर पर हुआ है. यह भविष्यवाणी महाभारत के आदिपर्व में द्रौपदी जन्म प्रसंग में दी गई है. भाई धृष्टद्युम्न के साथ उनका जन्म अग्निकुंड से हुआ था. दोनों के जन्म के साथ ही उनके जीवन के उद्देश्य की घोषणा आकाशवाणी के रूप में की गई थी.

अग्निकुंड से पैदा होने के कारण दिव्य सुंदरता

चूंकि द्रोपदी अग्निकुंड से पैदा हुईं थीं, लिहाजा उनकी सुंदरता में भी खास चमक थी. उनकी सुंदरता को अद्वितीय और दिव्य माना गया. उन्हें दिव्य सौंदर्य की देवी के समान बताया गया. महाभारत के आदिपर्व और सभापर्व में द्रौपदी की सुंदरता को लेकर जो कहा गया, वो मुख्य तौर पर ये है –

उनका रंग सांवला (कृष्णवर्ण) था, आंखें बड़ी, काली और कमल की पंखुड़ियों सरीखी।

उनके बाल नीले-काले, लंबे और घुंघराले थे।

उनके नाखून सुंदर, उभरे हुए और तांबे जैसे चमकीले थे।

उनकी भौंहें सुंदर और छाती गहरी थीं।

उनकी कमर पतली और शरीर सुडौल था।

उनके शरीर से नीले कमल जैसी सुगंध निकलती थी, जो दूर तक महसूस की जा सकती थी. जहां से भी गुजरती थीं, वहां विशेष आकर्षण और सुगंध छोड़ जातीं थीं।

उनके चेहरे पर अग्नि से उत्पन्न तेज था, जो उन्हें और भी आकर्षक बनाता था

जब एक पांडव से दूसरे के पास जाती तो क्या होता था

द्रौपदी की सुंदरता इतनी अनुपम थी कि उन्हें देखकर अन्य स्त्रियां साधारण लगती थीं. उनकी सुंदरता की तुलना अप्सराओं और लक्ष्मी से की गई. महर्षि वेदव्यास से उन्हें यह वरदान भी प्राप्त था कि वे हर बार कौमार्य (यौवन) को फिर से लेती थीं, जिससे उनका रूप सदैव 16 वर्ष की कन्या जैसा बना रहता था।

इस वरदान के अनुसार, द्रौपदी जब भी एक पति (पांडव) से दूसरे पति के पास जाती थीं, तो उनका कौमार्य फिर लौट आता था. इसका अर्थ यह था कि पांच पतियों की पत्नी होते हुए भी द्रौपदी का कौमार्य हर बार अक्षुण्ण बना रहता था।

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