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दुनिया का सबसे मॉडर्न मुस्लिम देश

दुनिया का सबसे मॉडर्न मुस्लिम देश : दुनिया में 50 से ज्‍यादा मुस्लिम बहुत आबादी वाले देश हैं. जिसमें कुछ तो भारत के पड़ोस में ही हैं जैसे- पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश. मुस्लिम देशों के नाम पर जेहन में बुरका पहनी औरतें, लंबी दाढ़ी रखें सलवार-पायजामा पहने पुरुषों की इमेज आ जाती …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 28 फ़र, 2025
दुनिया का सबसे मॉडर्न मुस्लिम देश

दुनिया का सबसे मॉडर्न मुस्लिम देश : दुनिया में 50 से ज्‍यादा मुस्लिम बहुत आबादी वाले देश हैं. जिसमें कुछ तो भारत के पड़ोस में ही हैं जैसे- पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश. मुस्लिम देशों के नाम पर जेहन में बुरका पहनी औरतें, लंबी दाढ़ी रखें सलवार-पायजामा पहने पुरुषों की इमेज आ जाती है. साथ ही विशेष तौर पर महिलाओं के लिए सख्‍त नियम होते हैं. लेकिन इस सबसे इतर कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां मुस्लिम महिलाएं काफी आजादी से जिंदगी बिताती हैं. दुनिया में इस्‍लाम मानने वाले करीब 1.8 अरब लोग हैं. यानी दुनिया की कुल आबादी में 20 फीसदी से ज्‍यादा लोग इस्लाम को मानते हैं. कुछ देश ऐसे हैं जो खासे लिबरल हैं और दुनिया की अर्थव्यवस्था के केंद्र बने हुए हैं. इनमें से एक मुस्लिम देश तो इतना आधुनिक है कि वहां बिन ब्‍याही लड़की को भी मां बनने की इजाजत है।

सऊदी अरब सबसे आधुनिक मुस्लिम देश

भारत के बेहद करीब में स्थित इस्लामिक देश सऊदी अरब दुनिया का सबसे आधुनिक मुस्लिम देश है. यहां कुछ साल पहले एक ऐसा कानून बनाया गया जिसके तहत यहां रह रही लड़कियों या महिलाओं को बिना शादी किए मां बनने की इजाजत दी गई. हालांकि यह कानून यहां रह रहे गैर-मुस्लिम लोगों के लिए बनाया गया है. इसे ‘फेडरल पर्सनल स्टेटस लॉ’ नाम दिया गया है।

करीब 2 साल पहले जब UAE ने यह नया नियम लाया तो पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हुई. सऊदी अरब सरकार ने इस लॉ को इतना उदार कर दिया गया है कि इसकी तुलना यूरोप के किसी देश से की जा सकती है. यह लॉ यूएई में रह रहे गैर मुस्लिम लोगों की शादी, तलाक, बच्चे की कस्टडी, संपत्ति पर अधिकार, विल आदि को लेकर बेहद उदार है. इस कानून के जरिए यहां रह रहे विदेशी लोगों को और अधिक धार्मिक आजादी और उनके हिसाब से जीने की स्वतंत्रता दी गई है।

पिता का नाम उजागर करना भी जरूरी नहीं

अमीर देशों में शामिल सऊदी अरब ने जो कानून बनाया, उसके तहत लड़की बिना शादी किए मां बन सकती है और यहां तक कि इसके लिए उसे बच्‍चे के पिता का नाम उजागर करने की भी जरूरत नहीं है. बिना पति के नाम के भी बच्‍चे का बर्थ सर्टिफिकेट बन सकता है. इस कानून के मुताबिक यूएई में रहने वाली कोई गैर मुस्लिम लड़की 21 साल की उम्र में अपने पिता या परिवार की मर्जी के बगैर अपनी पसंद से शादी कर सकती है. वहीं गैर-मुस्लिम दंपति यदि तलाक लेना चाहें तो वे आपसी सहमति से तलाक ले सकते हैं. या फिर पति-पत्‍नी में से कोई एक भी तलाक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है. बता दें कि इस कानूनी सुधार को 27 नवंबर 2021 में मंजूरी दी गई थी।

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