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बाघ हुए खूंखार, हमलों में तेज़ी: 19 दिनों में वन्यजीव हमलों से छह लोगों की मौत

उत्तराखंड में मानव–वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। राज्य के विभिन्न इलाकों में वन्यजीवों के हमलों ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है। बीते 19 दिनों के भीतर वन्यजीवों के हमलों में छह लोगों की जान जा चुकी है, जिससे वन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 20 जन, 2026
बाघ हुए खूंखार, हमलों में तेज़ी: 19 दिनों में वन्यजीव हमलों से छह लोगों की मौत

उत्तराखंड में मानव–वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। राज्य के विभिन्न इलाकों में वन्यजीवों के हमलों ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है। बीते 19 दिनों के भीतर वन्यजीवों के हमलों में छह लोगों की जान जा चुकी है, जिससे वन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

सर्दियों के मौसम में आमतौर पर भालुओं के हाइबरनेशन में चले जाने से उनके हमलों में कमी आने की उम्मीद की जाती है, लेकिन इसके बावजूद राज्य में भालू के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी भालुओं के हमले सामने आ रहे हैं, जिससे स्थानीय लोग भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।

भालुओं के बाद अब बाघों के हमलों में भी तेज़ी देखी जा रही है। इस महीने अब तक हुई छह मौतों में से चार लोगों की जान बाघ के हमलों में गई है। ये घटनाएं जंगल से सटे गांवों और खेतों के आसपास हुई हैं, जहां लोग रोज़मर्रा के कामों के लिए बाहर निकलते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में घटता प्राकृतिक आवास, भोजन की कमी और मानव बस्तियों का जंगलों के करीब बढ़ना इस बढ़ते संघर्ष की प्रमुख वजहें हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग खेती, लकड़ी बीनने और पशुपालन के लिए जंगलों पर निर्भर हैं, जिससे उनका वन्यजीवों से आमना-सामना हो रहा है।

लगातार हो रही घटनाओं के बाद स्थानीय लोग सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और प्रभावित इलाकों में गश्त बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, वन विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

मानव–वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाएं राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं, जिस पर समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद ज़रूरी हो गया है।

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