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सीपीए सम्मेलन में कनाडा में लहराया तिरंगा

Tricolor waved in Canada at CPA conference Reporter rajat kumar देहरादून 26 अगस्त| कनाडा हेलीफैक्स, नोवा स्कोटिया में कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के 65वें सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के नीचे सीपीए भारत रीजन के अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने सम्मेलन में भाग लिया| इस …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 26 अग, 2022
सीपीए सम्मेलन में कनाडा में लहराया तिरंगा

Tricolor waved in Canada at CPA conference
Reporter rajat kumar देहरादून 26 अगस्त| कनाडा हेलीफैक्स, नोवा स्कोटिया में कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के 65वें सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के नीचे सीपीए भारत रीजन के अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने सम्मेलन में भाग लिया| इस दौरान भारत के प्रतिनिधिमंडल ने जनरल एसेंबली तक तिरंगा मार्च निकाला|

उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने भी हाथ में तिरंगा लेकर एवं सिर पर ब्रह्मकमल पहाड़ी टोपी पहन कर भारत के प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों के साथ भारत माता की जय के नारे लगाए| विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विदेशी धरती पर तिरंगा मार्च निकालना एक गौरव का क्षण था|

बता दें कि कनाडा में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन का थीम इंक्लूसिव, एक्सेसिबल अकाउंटेबल एंड स्ट्रांग पार्लियामेंट, द कॉर्नर स्टोन ऑफ डेमोक्रेसी एंड एसेंशियल फार डेवलपमेंट रहा| सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर आठ कार्यशालाएं आयोजित हुई।

इस संसदीय सम्मेलन में भारत ने ‘कार्यशाला जन संसद व नवाचार के माध्यम से सुगम्यता’ में पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया। इस सम्मेलन में ‘यूथ राउंडटेबल-सायबर बुलिंग: यूथ ट्रोलिंग एंड मेंटल हेल्थ’ सहित रोल ऑफ पार्लियामेंट: अचीविंग सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स’ एवम् ‘महामारी के दौरान सदन की भूमिका और जिम्मेदारियां’ जैसे महत्त्वपूर्ण विषय पर गंभीरता से चर्चा हुई|

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने अचीविंग सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स विषय पर पक्ष रखते हुए कहा कि सतत विकास लक्ष्यों को वर्ष 2030 तक प्राप्त करने के लिए भारत दृढ प्रतिबद्ध है और लोकसभा एवं राज्यों की विधानसभाओं ने भी इस दिशा में गंभीर प्रयास किए हैं। ‘महामारी के दौरान सदन की भूमिका और जिम्मेदारियां’ विषय पर कहा की वैश्विक महामारी में जहां पूरा विश्व कोरोना की वजह से रुका हुआ था।

ऐसे में भारत की विधायिका के समक्ष चुनौती थी कि महामारी के साथ साथ संसद और विधानमण्डलों की बैठक कैसे बुलाई जाए। इन परिस्थितियों की चुनौतियों का सामना करते हुए हमारी संसद एवं विधानसभाओं के सत्र चले पक्ष हो या विपक्ष सभी ने अपना सहयोग दिया| उन्होंने कहा की चुनौतियां हमको आने वाले समय के लिए तैयार करती है कि हम ऐसे कानून और योजनाओं का निर्माण करें ताकि हम आने वाली चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक कर सके|

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