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नारी निकेतन की महिलाओं के लिए जिला प्रशासन की अनोखी पहल,

देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रोबेशन कार्यालय द्वारा राजकीय महिला कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र, नारी निकेतन की महिलाओं को शहर के सिटी पार्क में भ्रमण कराया गया। इस संवेदनशील और मानवीय पहल का उद्देश्य नारी निकेतन में निवासरत महिलाओं को सकारात्मक, खुला एवं प्राकृतिक वातावरण …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 27 फ़र, 2026
नारी निकेतन की महिलाओं के लिए जिला प्रशासन की अनोखी पहल,

देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रोबेशन कार्यालय द्वारा राजकीय महिला कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र, नारी निकेतन की महिलाओं को शहर के सिटी पार्क में भ्रमण कराया गया। इस संवेदनशील और मानवीय पहल का उद्देश्य नारी निकेतन में निवासरत महिलाओं को सकारात्मक, खुला एवं प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना तथा उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना था।

भ्रमण के दौरान महिलाओं ने पार्क की हरियाली, स्वच्छ वातावरण और खुले आसमान के नीचे समय बिताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर उन्होंने सामूहिक रूप से टहलना, आपसी संवाद, नृत्य एवं अन्य मनोरंजक गतिविधियों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। महिलाओं को सिटी पार्क में ही भोजन भी कराया गया। लंबे समय बाद बाहरी वातावरण से जुड़ाव मिलने पर उनके चेहरों पर संतोष और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।

जिला प्रशासन का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पुनर्वास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं। बाहरी दुनिया से सकारात्मक संपर्क स्थापित होने से महिलाओं में आत्मबल, आशा और सामाजिक समायोजन की भावना विकसित होती है। इस पहल के बाद नारी निकेतन के वातावरण में भी सकारात्मक परिवर्तन देखा गया है।

कार्यक्रम के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, अधीक्षिका सोनल राणा सहित अन्य कार्मिक उपस्थित रहे। अधिकारियों ने महिलाओं से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और सुझावों को भी जाना। प्रशासन ने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि नारी निकेतन में रह रही महिलाओं को सामान्य जीवन का अनुभव मिल सके और उनके समग्र विकास को बढ़ावा मिले।

जिलाधिकारी ने कहा कि समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों के प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक, स्वस्थ और सकारात्मक जीवन की ओर अग्रसर करना भी उतना ही आवश्यक है। यह पहल उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

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