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उत्तराखंड विधानसभा में अभूतपूर्व हंगामा: कांग्रेस विधायकों ने तोड़े माइक, फाड़ी कार्यसूची

गैरसैंण: उत्तराखंड विधानसभा के मानसून सत्र में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों का विरोध प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि उन्होंने सदन की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। विपक्षी विधायकों ने सचिव की मेज पलटने की कोशिश की, माइक तोड़ डाले और कार्यसूची फाड़कर हवा में उछाली, जिससे सदन …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 19 अग, 2025
उत्तराखंड विधानसभा में अभूतपूर्व हंगामा: कांग्रेस विधायकों ने तोड़े माइक, फाड़ी कार्यसूची

गैरसैंण:  उत्तराखंड विधानसभा के मानसून सत्र में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों का विरोध प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि उन्होंने सदन की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। विपक्षी विधायकों ने सचिव की मेज पलटने की कोशिश की, माइक तोड़ डाले और कार्यसूची फाड़कर हवा में उछाली, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह से बिगड़ गया।

कांग्रेस विधायकों के इस अभूतपूर्व व्यवहार से विधानसभा अध्यक्ष ने गहरी नाराजगी जताई और कहा कि “यह बेहद दुखद है।” उन्होंने बताया कि सदन के अंदर सचिव की टेबल, माइक और टैबलेट को तोड़ दिया गया है, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं का घोर उल्लंघन है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायकों ने वेल में कागज लहराए और लगातार नारेबाजी करते रहे। कार्यसूची की प्रतियां फाड़कर सदन में बिखेरने के बाद सभी विपक्षी विधायक वेल में धरने पर बैठ गए। इस अराजक स्थिति के कारण सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।

एक  घटना यह भी हुई कि जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने स्थान से बोलने का प्रयास कर रहे थे, तो उनका माइक खराब हो गया। इसके बाद उन्हें अपनी कुर्सी से पीछे जाकर मंत्री के माइक का उपयोग करना पड़ा। सीएम ने इस दौरान दिवंगत पूर्व विधायक मुन्नी देवी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सदन में मुन्नी देवी की स्मृति में निधन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भी कांग्रेस विधायकों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि वे प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं, लेकिन उनके तरीकों की व्यापक आलोचना हो रही है।

सदन की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की इस घटना से न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं का हनन हुआ है, बल्कि करदाताओं के पैसे की भी बर्बादी हुई है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का व्यवहार सदन की गरिमा के विपरीत है और इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए।

कानून व्यवस्था पर कांग्रेस के निरंतर विरोध के कारण सदन की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है। यह स्थिति न केवल जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा में बाधक है, बल्कि सरकार के 5000 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट की प्रस्तुति में भी देरी कर रही है।

 

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