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सहकारी समितियों के आम चुनाव में देरी के खिलाफ उत्तराखण्ड में उबाल, देहरादून में हुआ विशाल धरना-प्रदर्शन

देहरादून: उत्तराखण्ड के सहकारी आंदोलन ने सोमवार को एक ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए देहरादून स्थित सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में प्रदेशभर से आए हजारों सहकार बंधुओं ने सहकारी समितियों के आम चुनाव 2025 में हो रही असहनीय देरी के खिलाफ तीव्र नाराज़गी जताई। प्रदर्शनकारियों …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 02 मई, 2025
सहकारी समितियों के आम चुनाव में देरी के खिलाफ उत्तराखण्ड में उबाल, देहरादून में हुआ विशाल धरना-प्रदर्शन

देहरादून: उत्तराखण्ड के सहकारी आंदोलन ने सोमवार को एक ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए देहरादून स्थित सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में प्रदेशभर से आए हजारों सहकार बंधुओं ने सहकारी समितियों के आम चुनाव 2025 में हो रही असहनीय देरी के खिलाफ तीव्र नाराज़गी जताई।

प्रदर्शनकारियों ने सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट रूप से मांग की कि 12 मई 2025 तक चुनाव की तिथि घोषित की जाए। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि उक्त तिथि तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं होती है, तो प्राधिकरण कार्यालय में तालाबंदी और अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत की जाएगी।

न्यायालय के आदेश के बाद भी निष्क्रिय प्राधिकरण

गौरतलब है कि माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली ने 07 अप्रैल 202* को आदेश दिया था कि सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण को 01 मई 2025 तक चुनाव प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इसके बावजूद कोई ठोस कार्यवाही न होने से सहकारी समितियों के लाखों सदस्यों में भारी आक्रोश व्याप्त है। यह देरी सहकारी लोकतंत्र को बाधित कर रही है और उत्तराखण्ड के सहकारी आंदोलन की नींव को कमजोर कर रही है।

जिला सहकारी बैंक टिहरी के निवर्तमान अध्यक्ष सुभाष रमोला ने कहा, “प्राधिकरण की निष्क्रियता से टिहरी गढ़वाल की सहकारी समितियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। लाखों सदस्य अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित हैं। हम 12 मई तक का समय दे रहे हैं, इसके बाद तालाबंदी और अनिश्चितकालीन धरना किया जाएगा।”

पौड़ी के निवर्तमान अध्यक्ष नरेंद्र सिंह रावत ने भी प्राधिकरण पर निशाना साधते हुए कहा, “हमने बार-बार अनुरोध किया, पत्र लिखे, लेकिन प्राधिकरण ने कोई जवाब नहीं दिया। यह विश्वासघात है। अब आंदोलन ही अंतिम रास्ता है।प्रदर्शन में शामिल सहकार बंधुओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल चुनाव की मांग नहीं, बल्कि सहकारी व्यवस्था और लोकतंत्र को जीवित रखने का संकल्प है। उत्तराखण्ड की सहकारी समितियां प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और समय पर चुनाव न होना प्रशासनिक व्यवस्था व पारदर्शिता को प्रभावित कर रहा है।

इस मौके पर नरेंद्र सिंह रावत (निवर्तमान अध्यक्ष, पौड़ी), सुनील हनुमंती (निवर्तमान निदेशक), बसंत सिंह कठेत, जे.पी. चंद, नरेश नेगी, सतपाल कलोडा, डॉ. विजय लक्ष्मी, रोशनी राणा, कुलदीप कठेत, टिका राम भट्ट, रणधीर बिष्ट सहित विभिन्न समितियों के सरपंच और सैकड़ों सदस्य उपस्थित रहे |

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