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उत्तराखंड: मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को अब मैदान में उतरेंगे ‘माननीय’; सांसद निधि से मिलेगी मदद, तैयार हुआ नया ‘बॉटम-अप’ प्लान.

देहरादून (31 जनवरी 2026): उत्तराखंड में आए दिन हो रही मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए अब केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि भी मोर्चा संभालेंगे। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के निर्देशों के बाद एक नई रणनीति तैयार की गई है, जिसके तहत …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 31 जन, 2026
उत्तराखंड: मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को अब मैदान में उतरेंगे ‘माननीय’; सांसद निधि से मिलेगी मदद, तैयार हुआ नया ‘बॉटम-अप’ प्लान.

देहरादून (31 जनवरी 2026): उत्तराखंड में आए दिन हो रही मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए अब केवल वन विभाग ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि भी मोर्चा संभालेंगे। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के निर्देशों के बाद एक नई रणनीति तैयार की गई है, जिसके तहत सांसद, विधायक और स्थानीय निकाय प्रतिनिधि सीधे मैदान में उतरेंगे और स्थानीय भाषा में लोगों को जागरूक करेंगे।

‘बॉटम-अप’ रणनीति पर होगा काम देहरादून में आयोजित वन विभाग की कार्यशाला में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल और कल्पना सैनी ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में तय किया गया कि संघर्ष रोकने की रणनीति अब ‘ऊपर से नीचे’ नहीं, बल्कि ‘नीचे से ऊपर’ (Bottom-Up) होगी। गांव, ग्राम सभा, महिला मंगल दल और युवा समूहों को सीधे जोड़ा जाएगा। जागरूकता अभियान अब क्षेत्रीय भाषाओं (गढ़वाली/कुमाऊंनी) में चलाए जाएंगे ताकि संदेश प्रभावी हो।

रेडियो कॉलर और सोलर लाइट से होगी सुरक्षा WWF इंडिया ने बताया कि वन विभाग को रेडियो कॉलर दिए गए हैं, जिनसे जानवरों की मूवमेंट पर नजर रखकर ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ बनाया जाएगा। इसके अलावा, संघर्ष रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे: सोलर लाइट्स: संवेदनशील गांवों में रोशनी की व्यवस्था। भोजन व्यवस्था: जंगल किनारे फलदार पेड़ लगाए जाएंगे ताकि जानवर आबादी की तरफ न आएं। झाड़ी कटान: रिहायशी इलाकों के पास लैटाना झाड़ियों को साफ किया जाएगा।गुलदार गणना: संघर्ष वाले इलाकों में गुलदारों की सटीक संख्या जानने के लिए विशेष गणना होगी।

 

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