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उत्तराखंड: UCC में हुआ बड़ा संशोधन, लिव-इन और विवाह नियमों में सख्त बदलाव; राज्यपाल की मुहर के बाद अध्यादेश लागू

देहरादून (26 जनवरी 2026): समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य उत्तराखंड अब इसे और भी प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत ‘समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026’ को मंजूरी …

By Hindi News 24x7 - News Editor
Last Updated: 26 जन, 2026
उत्तराखंड: UCC में हुआ बड़ा संशोधन, लिव-इन और विवाह नियमों में सख्त बदलाव; राज्यपाल की मुहर के बाद अध्यादेश लागू

देहरादून (26 जनवरी 2026):

समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य उत्तराखंड अब इसे और भी प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत ‘समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026’ को मंजूरी दे दी है। यह संशोधित कानून तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू हो गया है।

कल, यानी 27 जनवरी 2026 को उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुए पूरा एक साल हो जाएगा, जिसे सरकार ‘यूसीसी दिवस’ के रूप में मनाएगी।

​संशोधन के बाद क्या बदला? (प्रमुख बिंदु)

​सरकार ने व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने और कानून को सख्त बनाने के लिए ये 9 बड़े बदलाव किए हैं:

​नए कानून लागू: अब पुराने कानूनों की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधान लागू होंगे।

​सक्षम प्राधिकारी बदला: धारा 12 के तहत अब ‘सचिव’ की जगह ‘अपर सचिव’ (Additional Secretary) को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है।

​ऑटो-फॉरवर्डिंग सिस्टम: अगर उप-पंजीयक (Sub-Registrar) तय समय में कार्रवाई नहीं करते, तो मामला अपने आप (स्वतः) पंजीयक और पंजीयक जनरल को फॉरवर्ड हो जाएगा।

​अपील और वसूली: उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के खिलाफ अपील का अधिकार दिया गया है। दंड की वसूली अब भू-राजस्व (Land Revenue) की तरह होगी।

​विवाह निरस्तीकरण: अगर शादी के वक्त पहचान से जुड़ी गलत जानकारी दी गई, तो इसे विवाह रद्द करने का आधार माना जाएगा।

​लिव-इन और विवाह में सख्ती: विवाह या लिव-इन रिलेशनशिप में बल प्रयोग, दबाव, धोखाधड़ी या गैर-कानूनी कृत्यों के लिए अब कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे।

​लिव-इन समाप्ति सर्टिफिकेट: लिव-इन रिलेशनशिप खत्म होने पर पंजीयक द्वारा ‘समाप्ति प्रमाण पत्र’ जारी करना अनिवार्य कर दिया गया है।

​लैंगिक समानता: अनुसूची-2 में “विधवा” शब्द को हटाकर अब ‘जीवनसाथी’ (Spouse) शब्द कर दिया गया है, जो लैंगिक तटस्थता को दर्शाता है।

​पंजीकरण रद्द करने की शक्ति: विवाह, तलाक, लिव-इन और उत्तराधिकार के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की पावर अब पंजीयक जनरल (Registrar General) के पास होगी।

 

 

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